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शाबर मंत्र संग्रह

काले जादू को पलटाना

॥ मंत्र ॥

ॐ वज्र मुस्ठी वज्र किवाड़।
वज्र बाँधों दश द्वार।
वज्र पानी पिबेच्चांगे।
डाकिनी डापिनी रक्षोव सर्वांगे।
मन्त्र ज्यो शत्रु भयो।
डाकिनी वायो, जानु वायो।
काली काली शामनते।
ब्रह्मा की धीशु शाशु।
डाकिनी मिली करि।
मोरो जिड़ घात करेति।
पतने पानी करे।
गुआ करे।
याने करे।
सुते करे।
परिहासे करे।
नयन कटाक्षी करे।
आपो न हाते। परहाते।
जियति संचारे।
किलनी पोतनी।
अनिन्तुश्वरि करे।
एते विज्ञानं अहिन न नगयो।
मोहि करेत्साराकुठीतिलसकम सरुपद्रे।
ॐ मोसिद्धि गुरुपराय स्वीलिंग।
महादेव की आज्ञा।

विधि: २१ दिनों का ये अनुष्ठान है, २१ माला प्रतिदिन करनी है सूर्योदय से पहले। और फिर जब भी आवश्यकता पड़े जल में त्राटक करते हुए मंत्र को सात बार जप करके जल में फूंक मारो। तब ये जल काले जादू से ग्रसित व्यक्ति को पिलायें। जिसने किया है ये कला जादू। इस मंत्र शक्ति से कला जादू या किया कराया टोटका वापिस करने वाले पर चला जायेगा और कभी वापिस नही आएगा।

2…(नारसिंह वीर)

वीरों की साधना अत्यंत उग्र और तीव्र होती है , वीर कई होते है ।
परन्तु मैं यहाँ नरसीह वीर के विषय में बता रहा हूँ ।
इनकी कोई लिमिट नही होती है ।
जिस पर इनका प्रयोग कर दो ।
मौत से भी बत्तर कर देते है उसे ।
जब मैंने प्रथम बार इनकी साधना की
करना मुस्किल हो गया था ।
2 माला जाप करते ही पुरे शरीर में तीव्र पीड़ा और
सामने अद्भुत स्वरूप के काले सिह के मुख वाले नर्सिघ
वीर के दर्शन हुए
जो आसन के चारों तरफ घूम घूम मुझे भय भीत कर रहे थे ।
बस गुरु मंत्र के कारण ही मैं उस तेज को
सहन कर पा रहा था ,और कोई हानि नही हुई ।

शत्रु के विनाश के लिए यह अत्यंत्र तीव्र वीर है ।

इसी प्रकार मैंने दो अन्य वीरों के
बारे में भी पता किया
जिसमे से एक
डोंकासार
दूसरा चीलमण्डाल था ।

काफी समय पहले मेरी भेट एक तांत्रिक से हुई ।
जिसने बताया की मेरे दादा जी बंगाल से तंत्र सिख दो वीर लाये थे ।
वो इतने शक्ति शाली थे
की साधक पहाड़ उठा ले उनकी शक्ति से ।
मगर उन वीरों की
ये आन थी की वो हाथ में या जमीन पर ही रख के
रोटी खाते थे ।
थाली में खाने से थाली कई टुकडो में फट जाती थी ।
वो बच्चो कओ हांथों से
खिला नही पाते थे ।
क्यूंकि वेग था वीरों का
जब कभी नाती पोतों पर प्यार आता लात से ही खिलाते थे ।
वीरों की सिद्ध के बाद
कुछ ब्न्दिसों का पालन करना ही होता है ।
4 रोटी उन्हें खाने को मिलती थी तो 2 वीरों को ।
बुला क फेकते थे
जो कभी कौवा तो कुत्ता के द्वारा वीरों की ट्रपति हो जाती थी ।
वीर सिद्धि के बाद असीम हाथियों की शक्ति जितनी तागत साधक के साथ चलती है ।

3…विशेष प्रभावी वैभवदाता शिव मंत्र -
ॐ ह्रीँ श्रीँ ठं ठं ठं नमो भगवते मम सर्व कार्याणि साधय साधय माम् रक्ष रक्ष शीघ्रं माम् धनिनं कुरू कुरू हुं फट् श्रियं देहि ममापत्तिं निवारय निवारय स्वाहा ।
इसे कंठस्थ करे फिर शिव मंदिर मेँ शिवलिँग के पास बैठकर रूद्राक्ष की एक माला नित्य जाप करेँ एक वर्ष पर्यन्त शिव क्रपा से संकट मुक्त होकर सुख सौभाग्य का पात्र बन जाता है आर्थिक स्थिति सुद्रढ हो जाती है ।

4…वीर नृसिंह साधना दीक्षा ।।।। गुरु दीक्षा लेके साधना करे।।

भगवान वीर नृसिंह की साधना उपासना वेदोक्त तथा तंत्रोक्त दोनों पद्धतियों में निहित है. तंत्र में भगवान नृसिंह के ९ विविध स्वरुप के बारे में विविरण तथा साधना पद्धति प्राप्त होती है. इनके इन्ही ९ रूप में एक स्वरुप है वीरनृसिंह स्वरुप. साधना जगत में यह तथ्य तो विख्यात ही है की श्री आदिशंकराचार्य जी ने भी इनके यही स्वरुप की साधना की थी तथा समय समय पर भगवान नृसिंह ने विविध रूप से प्रकट हो कर शंकराचार्य को कई आकस्मिक खतरों से तथा बाधाओ से पूर्ण सुरक्षा प्रदान की थी. प्रस्तुत प्रयोग भगवान नृसिंह के इसी स्वरुप से सबंधित प्रयोग है जो की इनके मूल मन्त्र से सम्प्पन होता है. इस प्रयोग से साधक को कई लाभों की प्राप्ति होती है.।।
साधक में वीरता का संचार होता है तथा भय का नाश होता है।।
अज्ञात बाधाओ से साधक को सुरक्षा मिलती है।।
साधक के शत्रुओ का तथा शत्रु सबंधित समस्याओ का निराकरण होता है।।
साधक के कई प्रकार के दोषों की निवृति होती है और साधक का पवित्रीकरण होने लगता है।।
साधक अगर किसी तंत्र बाधा या प्रेत बाधा से ग्रसित होता है तो उसे उससे मुक्ति मिलती है. प्रयोग की प्रक्रिया पद्धति इस प्रकार है.
इस साधना को साधक रविवार के दिन शुरू करे रात्री में ९ बजे के बाद साधक स्नान आदि से निवृत हो कर लाल वस्त्रों को धारण करे. साधक लाल आसान पर उत्तर की तरफ मुख कर बैठ जाए।।
इसके बाद साधक अपने सामने नृसिंह का चित्र, विग्रह या यंत्र स्थापित करे. साधक गुरुपूजन तथा गणेशपूजन के साथ ही साथ भगवान नृसिंह के चित्र, विग्रह या यन्त्र का भी सामान्य पूजन करे. साधक यथा संभव गुरुमंत्र का जाप करे.

इसके बाद साधक सदगुरु तथा भगवान नृसिंह से साधना में सफलता के लिए आशीर्वाद मांगे तथा मानसिक आज्ञा ले कर निम्न मंत्र का जाप करे.

साधक को निम्न मंत्र की ५१ माला मंत्र जाप करना है. मंत्र जाप के लिए साधक मूंगामाला का प्रयोग करे.

ॐ क्षौं फट्।।

साधक यही क्रम ५ दिन तक जारी रखे. अंतिम दिन साधक को अग्नि प्रज्वलित कर के इस मंत्र से शुद्ध घी की १०८ आहुति देनी चाहिए. इस प्रकार यह साधना पूर्ण होती है. प्रयोग पूर्ण होने पर साधक माला को धारण कर सकता हैं।।।

5…“ सर्व बाधा निवारण नृ्सिंह साधना दीक्षा “
ग्रहण करे जिससे इस मन्त्र के जाप से होने वाले दोषो को भी काटा जा सके !!क्योकि कोई भी साधान बिना मार्ग दर्षन के बिना गुरु के सिद्ध नहि होति या पुर्ण फल प्रदान नही करती !!
भगवान नृ्सिंह भगवान विष्णु के सबसे उग्ररुप को धारन करते है वे जहाँ उग्र है वहां वे ज्यादा शक्तिशालि होते हुये भी दयावान प्रवृ्त्ति को धारण करते है !!भगवान नृ्सिंह यन्त्र-तन्त्र-मन्त्र और तन्त्रशास्त्र के मूलाधार भी है यहि कारण है देवो श्री भैरवजी,श्री बजरंगबली और माता चण्डि तथा श्री नृ्सिंह देवजी अग्रणिय है !!श्री नृ्सिंह देव जी की पूजा बिना हनुमान जि , भैरव जी और चण्डि माता के संपुर्ण नही होति !! तिनो देवताओ का मान दे कर पुजन करने से सफलता मिलति है !!इस पुजन मे काला,लाल एवं पिला रंग के वस्त्रो का उपयोग होता है !!
इस विधि का प्रारंभ आप किसि भि मंगलवार से प्रारंभ कर सकते है एक हि मंगलवार चारो मन्दिर जाये !!
1. श्री हनुमान मंदिर:- श्री हनुमान जि के मंदिर मे जा कर दंड्वत प्रणाम कर भोग प्रदान करे वस्त्र प्रदान करे !!
भोग मे बुंदि के लड्डु, नारियल !! वस्त्र मे लाल रंग कि लंगोट !! जै श्री राम 7बार कहे
2.श्री भैरव मंदिर या शिव मंदिर:- श्री भैरव जि के मंदिर मे जा कर दंड्वत प्रणाम कर भोग प्रदान करे वस्त्र प्रदान
करे !!भोग मे दहि-बडा,, नारियल !! वस्त्र मे काला रंग कि लंगोट !!जै श्री महाभैरव 7 बार कहे
3.चण्डी माता के मंदिर :- श्री चण्डिमाता के मंदिर मे जा कर दंड्वत प्रणाम कर भोग प्रदान करे वस्त्र प्रदान करे !!भोग मे खीर,हलवा,पुरी,, नारियल !! वस्त्र मे लाल रंग का वस्त्र !!जै श्री चामुण्डायै 7 बार कहे
4.श्री नृ्सिंहदेव जि के मंदिर:- श्री नृ्सिह देव जि या विष्णु जी के मंदिर मे जा कर दंड्वत प्रणाम कर भोग प्रदान करे वस्त्र प्रदान करे !!भोग मे मिश्री,रोट,, नारियल !! वस्त्र मे पिला रंग का उपवस्त्र या गमछा !! जै नमो नारायणाय !
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
प्रातःकाल की संध्या तारे छिपने के बाद तथा सूर्योदय पूर्व करनी चाहिए।

शौच एवं स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहन कर, पूजा के कमरे या मन्दिर में प्रवेश से पहले द्वार पर इन तीनों मंत्रों से तीन बार अपने कान स्पर्श करे –
ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः।
फिर बायें हाथ पर दायें हाथ से ताली बजा कर नम्रता से प्रवेश करे!!
आसन ग्रहण करने से पुर्व 7 अगरबत्तियां चेतन करे !!
!! पाठ प्रारंभ !!
सतनमोआदेशगुरुजि को आदेश ओम गुरुजि
आदौ गणपति नत्वा,नत्वा शिव जगत्गुरुं!!
शंकर-गोरक्ष नत्वा,भजे हे माँ शक्ति…
!!श्री हनुमान जि महामन्त्र!!
ऊँ नमो हनुमन्ते वज्रकाय वज्रमुंड कपिलपिंगल कराल वदनोर्ध्वकेश महावल रक्तमुख तडिज्जिह्भ महारौद्र दृंष्ट्रात्कट कटकरालिन महादृ्ढ प्रहार लंकेश्र्वर सेतुबन्ध शैल प्रवाह गगनचर ऎह्योहि भगवन्महाबलपराक्रम भैरवो ग्यापयति ऎह्योहि महारौद्र दीर्घलांकलेन (गुप्तकष्ट) वेष्टय वेष्टाय जम्भय जम्भय खन-खन वैते ह्रूँ फट् !! ऊँ अंन्जनीगर्भसंभूताय नम: ऊँ पवनपुत्राय नम: ऊँ केसरीनंन्दाय नम: ऊँ लक्ष्मणप्राणदाताय नम: ऊँ सीता शोक विनाशाय नम: ऊँ रामचन्द्रभक्ताय नम: !!{मात्र 1बार पढे }
!! श्री महाभैरव फेतकरणी महामन्त्र !!
ऊँ शत्रुमुखस्तम्भनी कामरुपा आली ढकरी! ह्रीं फें फेत्कारिणी मम गुप्तकष्टानां मुखं स्तम्भय-स्तम्भय मम सर्वविद्वेषणां मुखस्तम्भनं कुरु कुरु ऊं हुँ फें फेत्कारिणी स्वाहा :!!
{मात्र 1बार पढे }

!!श्री त्रैलोक्य विजय चंडि महामन्त्र !!
ऊँ ह्रूँ क्षूँ ह्रूँ
ऊँ नमो भगवति दंष्ट्रिणि भिमवक्त्रे महोग्ररुपे हिलि हिलि रकतनेत्रे किलि किलि,महानिखने कुलु
ऊँ विधृ्ज्जिह्ने कुलु ऊँ निमसि कट कट,गोनसाभरणे चिलि चिलि,शव मालाधारीणि द्रावय
ऊँ महांरौद्रि सार्द्रचयर्मकृ्ताच्छदे विजृ्म्
ऊँ नृ्त्यासिलता धारिणि भ्रुकुटी कृ्तापागे विषमनेत्रेकृ्तापागे विषमनेत्रेकृ्तानेन वसामे दो विलि प्रशात्रे कह कह ,ऊँ हस हस क्रुध्य क्रुध्य
ऊँ निलजीमूतवर्णे Sभ्रामालाकृ्ता भरणे विस्फ़ुर
ऊँ घन्टाखार्कीणदेहे
ऊँ सिंसिस्थेSवरुपवर्णे
ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रूँ रौद्ररुपे ह्रूँ ह्रीं क्लीं
ऊँ ह्रीं ह्रूँ भोक्ताकर्ष
ऊँ धून धून
ऊँ हे हे: स्व: स्व: व्रजिजिणे ह्रूँ क्षूँ क्षा क्रोधरूपिणि प्रज्वल प्रज्वल
ऊँ भीम भीषणे भिन्द ,
ऊँ महाकाये छिन्द
ऊँ करालिनि किटि किटि महाभूतमात: सर्वद्रुष्टनिवारिणी जये,
ऊँ विजये
ऊँ त्रैलोक्यविजये ह्रूँ फट् स्वाहा !! {मात्र 1बार पढे }
!! श्री नृ्सिंह महामन्त्रराज !!
ऊँ नमो भगवते महावलपराक्रमाय नृ्सिंहाय,भूतप्रेत,पिशाच,शाकिनी-डाकिनी,याक्षिणी,पूतना,मारी-महामारी,यक्ष-राक्षस,भैरव-वेताल,ग्रह-राक्षसादिकं,क्षणेन हन-हन,भंजय-भंजय,मारय-मारय,क्षय-शिक्षय महाविष्णुवतार हुँ फट् स्वाहा !ऊँ नमो भगवते नृ्सिंहायदाख्या उग्रनृ्सिंह सर्वनदुष्ट मुखस्तम्भनं कुरु-कुरु क्षां क्षीं क्षौं फट् स्वाह !!
ऊँ नमो भगवते विष्णुवतार सर्व जन नन्दाय जोगी सन्यासी प्रकाशकाय हिराण्क्ष हिरण्याकश्यप साधकाय प्रल्हाद भक्ताय वशाय गम्भिर शब्दोदाय नरसिंह मुखाय,वज्रनखाय पीत्तवर्णाय क्षां क्षीं क्षौं सर्वदुष्ट निवारण फट् स्वाह !!
ऊँ नमो भगवते नृ्सिंहाय सर्वग्रहान भूताभविष्यद्वर्तमानान्दूरस्थान समीपस्थान सर्वकालदुष्ट दुर्बुद्धिनच्टायोचाटय परवलानि क्षोभय-क्षोभय मम् सर्व कार्य साधय नृ्सिंहाय
ऊँ क्षां क्षीं क्षौं फट् स्वाहा !
ऊँ शिवं ऊँ सिद्धि ऊँ फ़ट स्वाहा !!
ऊँ नमो भगवते नृ्सिंहाय परकृ्त यंत्र परSहंकार भूत प्रेत पिशाच पर दृ्ष्टि सर्वविघ्न दुर्जन चेटक विद्या सर्व ग्रहानिवाराय,वध-वध,पच-पच,इल-इल,चिलु-चिलु,किल-किल,सर्वकुयन्त्राणि दृ्ष्टवाचं फट् स्वाहा !!
ऊँ नमो भगवते नृ्सिंहाय पाहि-पाहि,एहि-एहि,सर्वग्रह भूतानां शाकिनी-डाकिनी,नाम विषम दुष्टानाम सर्वविषयानकर्षयाकर्षय मर्द-मर्दय,भेदय-भेदय,मृ्त्युत्पाटयोत्पाटय: शोषय-शोषय,ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल,भूत मंडल प्रेतमंडलम्,निरासय-निरासय,भूत ज्वर प्रेतज्वर,चातुर्थिकज्वर,
विषमज्वर,माहेश्वरज्वर छिन्द्धी-छिन्द्धि,भिन्धि-भिन्दि,अक्षशूल-वक्षशूल,शिरोशूल,गुल्मशूल,पितशूल ब्रह्मराक्षस कुल,परकूल नागकुल,विषम् नाशये-नाशय,निर्विषम् कुरु-कुर फ़ट् स्वाहा!
ऊँ नमो नृ्सिंहाय नरसिंह मुखाय हन-हनानय,दृ्ष्टाय पापदृ्ष्टिं षढदृ्ष्ट्रिं हन-हन ,नृ्सिंहाय ग्याय स्फुर-स्फुर फ़ट् स्वाहा !{7 बार जाप करे }
विसर्जन मंत्र –
ॐ उत्तमे शिखरे देवी भूम्यां पर्वतमूर्धनि।
ब्रह्मणेभ्योऽभ्यनुज्ञाता गच्छ देवि सर्व गणासहित यथासुखम॥
अब नीचे लिखा वाक्य पढ़कर संध्योपासन कर्म परमेश्वर को समर्पित करे।
अनेन संध्योपासनाख्येन कर्मणा श्रीपरमेश्वरः प्रीयतां न मम। ॐ तत्सत् श्रीब्रह्मार्पणमस्तु।

अब भगवान् का स्मरण करे।
यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञक्रियादिषु।
न्यूनं सम्पूर्णतां याति सद्यो वन्दे तमच्युतम्॥

ॐ श्रीविष्णवे नमः॥ ॐ श्रीविष्णवे नमः॥ ॐ श्रीविष्णवे नमः॥
॥ श्रीविष्णुस्मरणात् परिपूर्णतास्तु॥
॥इति॥

 

6…स्त्री पुरुष विद्वेषण

॥ मंत्र ॥

आक ढाक दोनों बगराई।

अमुका(लड़के क नाम ) अमुकी (लड़की क नाम ) ऐसेलड़े जैसे कुकुर बिलाई।

आदेश गुरु सत्य नाम को।

विधि: ढाक कि लकडी सुखी हुई व आक के पत्ते १०८।अब प्रत्येक पते पर ऊपर दिए मन्त्र को काली स्याही सेलिख दें। अब आधी रात को हवन करें ओर १०८ बारजप करते हुआ प्रत्येक पते को अग्नि मैं स्वहा कर दें। प्यार करने वाले आज के बाद एक दुषरे को देखना भिपसंद नहि करेंगे।

7…अति प्राचीन गुप्त शाबर मंत्र यह कंठस्थ होने पर ही सिद्ध है और शीघ्र फलदायक है ।
एक मुठ्ठी आटे को भस्म को कंकर को काली मिर्चा को काली उडद को बंधन ग्रस्त रोगी मकान दुकान आदि पर से उतार कर सुबह शाम हवा मेँ उडादेँ बुरी नजर किया कराया कीला किलाया टूट जावेगा तीन दिन लगातार करेँ ।
काला कलवा चौँसठ वीर वेगी आओ माई के वीर अजर तोडो बजर तोडो किले का बंधन तोडो नजर तोडो मूठ तोडो जंहा से आई वंही को मोडो जल खोलो जलवाई खोलो बंद पडे तूपक को खोलो घर दुकान का बंधन खोलो बंधे खेत खलिहान खोलो बंधा हुआ मकान खोलो बंधी नाव पतवार खोलो दस दिशा का बंधन खोलो इतना काम मेरा ना करे तो तुझको माता का दूध पिया हराम है माता पार्वती की दुहारे फिरै शब्द सांचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
आदेश गुरू गोरखनाथ

8…भूत-प्रेत बाधाओं, जादू-टोनों आदि के प्रभाव से भले-चंगे लोगों का जीवन भी दुखमय हो जाता है। ज्योतिष तथा शाबर ग्रंथों में इन बाधाओं से मुक्ति के अनेकानेक उपाय उपाय बताए गए हैं।

इस प्रकार की बाधा निवारण करने से पूर्व स्वयं की रक्षा भी आवश्यक हें.इसलिए इन मन्त्रों द्वारा अपनी तथा अपने आसन की सुरक्षा कर व्यवस्थित हो जाएँ…

जब भी हम पूजन आदि धार्मिक कार्य करते हैं वहां आसुरी शक्तियां अवश्य अपना प्रभाव दिखाने का प्रयास करती हैं। उन आसुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए हम मंत्रों का प्रयोग कर सकते हैं। इसे रक्षा विधान कहते हैं। नीचे रक्षा विधान के बारे में संक्षिप्त में लिखा गया है। रक्षा विधान का प्रयोग करने से बुरी शक्तियां धार्मिक कार्य में बाधा नहीं पहुंचाती तथा दूर से ही निकल जाती हैं।

रक्षा विधान- रक्षा विधान का अर्थ है जहाँ हम पूजा कर रहे है वहाँ यदि कोई आसुरी शक्तियाँ, मानसिक विकार आदि हो तो चले जाएं, जिससे पूजा में कोई बाधा उपस्थित न हो। बाएं हाथ में पीली सरसों अथवा चावल लेकर दाहिने हाथ से ढंक दें तथा निम्न मंत्र उच्चारण के पश्चात सभी दिशाओं में उछाल दें।
मंत्र

ओम अपसर्पन्तु ते भूता: ये भूता:भूमि संस्थिता:।
ये भूता: बिघ्नकर्तारस्तेनश्यन्तु शिवाज्ञया॥
अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचा: सर्वतो दिशम।
सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्मसमारभ्भे॥

9…आसन शाबर मन्त्र

॥ मंत्र ॥

ॐ आसन ईश्वर आसन इंद्र।

आसन बैठे गुरु गोविन्द।

अजर आसन वज्र कपाट।

अजर जुड़ा पिंड सोहं द्वार।

जो धाले अज़र पर घाव।

उल्ट वीर वाह्य को खाव।

आसन बैठे गुरु रामानंद।

दो कर जोड़ आसन कि रक्षा करें।

काया आस

न बैठे लक्ष्मण यति।

सोहं गोविन्द पढ़ी आसन पर।

ॐ रैं सोहं मन की भम्रणा दुरि खोयें।

रात्रि राखे चन्द्रमा।

दिन को राखे भानु।

धरती माता सद राखै।

काली कंटक दुरी भागे।

करेगा सो भरेगा।

भक्त जन कि रक्षा वीर हनुमान करेगा।

विधि: पहले इस मन्त्र को चँद्रमा ग्रहण पर २१ माला जप कर सिद्ध कर लो। फिर कोई बी कार्य करने से पहले इस मन्त्र को जप कर आसन के चारों ओर फूंक मार कर बैठ जाओ। फिर अपनी साधना करो या कार्य करो। जरूर सफलता मिलेगी।

10……चुड़ैल या डाकिनीझाड़ा

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो नारसिंह पार्डहार भस्मना।

योगिनी बंध।

डाकिनी बंध।

चौरासी दोष बंध।

अष्टोत्तर शत व्याधि बन्ध।

खेदी खेदी, भेःदि भेःदि, मारे मारे , सोखे सोखे।

ज्वल, ज्वल, प्रज्वल, प्रज्वल।

नारसिंह वीर कि शक्ति फुरो।

विधि: ग्रहण काल में २१ माला जप कर मंत्र सिद्ध कर लो। फिर आवश्यकता पड़ने पर १०८ बार जपते हुआ मोरपंख से झाड़ा लग दो।

11…टोनाटोटका का झाड़ा इलाज

॥ मंत्र ॥

लोहे का कोठा, वज्र किवाड़।

तिस पर नावों बारम्बार।

तेते नहि पहिनहि एकहु बार।

एक पंण्ठा अनण्डा बांधो।

डौठा मोती बांधो।

तीर बांधों।

स्वर्ग इन्द्र बांधों।

पाताले वासुकि बांधों।

सय्यद के पाँव शरण।

पाद कि शक्ति।

नरसिंह बादिकार।

खेलु खेलु शंकिनी डंकिनी।

सात सेतर के सकरी।

बारह मन के पहाड़।

तेहि ऊपर बैठ, अब दैवी चौतारकय।

आन जम्भाई जम्भाई।

गोरख कि दुहाई।

लोना कि दुहाई।

तैंतीस कोटि देवताओं कि दुहाई।

हनुमान कि दुहाई।

कशी कोतवाल भैंरों कि दुहाई।

अपने नहीं कटारी |

मार देवता खेल आप लेइ काशी आदि।

काशी पर पाप।

तेरे देवता के कन्ध चढाई।

काट जो मनमहं छोभ राख।

विधि: पहले to मन्त्र को सिद्ध कर लो। अमावसके दिन 21 माला जप कर।

फिर जब मन्त्र पढ़ते हुअ मोरपंख से झाड़ा लगाओगे तब टूना टोटका प्रत्यक्ष परिचय देकर खत्म हो जायेगा।

12…साबर मंत्रो को जगाने कीविधि:

|| मन्त्र ||

सत नमो आदेश ! गुरूजी को आदेश !
ॐ गुरूजी !
ड़ार शाबर बर्भर जागे ,
जागे अढैया और बराट
मेरा जगाया न जागे
तो तेरा नरक कुंड में वास !
दुहाई शाबरी माई की !
दुहाई शाबरनाथ की !
आदेश गुरु गोरख को !

|| विधि ||

इस मन्त्र को प्रतिदिन गोबर का कंडा सुलगाकर उसपर गुगलडाले और इस मन्त्र का 2.25 Hours जाप करे ! जब तकमन्त्र जाप हो गुगल सुलगती रहनी चाहिये ! यह क्रिया आपको41 दिन करनी है , अच्छा होगा आप यह मन्त्र अपने गुरु केमुख से ले या किसी योग्य साधक के मुख से ले ! गुरु कृपा हीसर्वोपरि है कोई भी साधना करने से पहले गुरु आज्ञा जरूर ले !

13…असली प्राचीन सिद्ध शाबर विद्या

1. सबसे पहली मुख्य विषेशता, ये मंत्र खुद सिद्ध होते है इनके लिया साधक को कठिन अनुस्ठान करने कि आवश्यकता नहीं है। बस जो आसान सी विधियां इ बुक्स में दी गयी है वो करें और मंत्रों का परभाव खुद साक्षात्कार करें।

2. सिद्धि कर्म (देवता, पीर पैगम्बर, वीर, जिन्न आदि प्रकट करना) – अगर आप अत्यधिक जिज्ञासु साधक है और अपने देवी देवता, पीर पैगम्बर, वीर, जिन्न, भूत, परी आदि से साक्षात् होना चाहते है या उनसे अपना काम करवाना चाहते है। तो इन शाबर मन्त्रों से बढ़कर कोई दूसरा सहायक नहीं हो सकता।

3. शांति कर्म (तांत्रिक कर्म, काला जादू , या किया कराये कि काट ) – अगर आपको लगता है कि आप पर कोई तांत्रिक कर्म, काला जादू , या किया कराये का प्रभाव है तो आपको किसी तांत्रिक या औघड़ बाबा के चकर में आने कि जरूरत नहीं है। सिद्ध शाबर मन्त्रों से आप अपना व् अपने परिवार के सुरक्षा चक्र बना सकते है जिस से वो सारा प्रभाव ख़तम हो जायेगा। इसके अलावा आप दूसरों पर से भी झाड़ा लगा कर उनको ठीक कर सकते है।

4. विद्वेषण कर्म (गलत प्रेम या बूरी लड़की या लड़के को दूर करना ) – अगरआपको लगता है कि आपका लड़का या लड़की औरभाई या बहन किसी गलत या किसी बूरी लड़की यालड़के के साथ प्रेम चल रहा है। तो बच्चे ऐसे मामलों मेंबड़ो कि नहीं सुनते बल्कि अगर बोलो और टोको तो वोया तो खुदखुशी या उनके साथ भाग जाते है और दोनोंही मामलों में घर कि इज़ज़त और जान हानि पर बनजाती है। उनको प्यार से समझाओ और विद्वेषण सिद्धमंत्र प्रयोग करें वो गलत लड़की या लड़का खुद आपकेबच्चों का पीछा छोड देगा और कभी बात करना भीपसंद नहीं करे गा। आप भी खुश और बच्चे भी।

5. रोगनाशक कर्म (बीमारी या रोग दूर करना)- आप सिद्ध शाबर मन्त्रों से विभिन्न परकार कि रोग भी मिटा सकते है बिल्कुल जड़ से। लेकिन यहाँ कुछ मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है।

6. वशीकरण प्रयोग (शोसन के खिलाफ और धर्म के लिए) – आजकल चारों और भ्रष्टाचार और काला बाजारी फ़ैल गयी है। और प्राइवेट जॉब्स में भी बॉस अपने एम्प्लाइज को सैलरी कम देते है और काम जयादा करवाते है। यहाँ पर हम अपने हक़ के लिए वशीकरण कर्म का प्रयोग कर करेंगे क्योंकि अपने हक़ के लिए लड़ना भी धर्म है। अगर प्रेम के लिए वशीकरण प्रयोग करो तो ध्यान रहे प्रेम निस्वार्थ और सच्चा होना चाहिए। वशीकरण का गलत प्रयोग करना मानवता का निरादर करना है और भगवान् उसको कभी माफ़ नहीं करते। इसीलिए इसको हमेशा मानवता कि भलाई के लिया ही प्रयोग करें।

7. स्तम्भन कर्म (शत्रु को रोकना)- अगर आपका कोई शत्रु आपको परेशान कर रहा है, तो उसको रोकने के लिए आप स्तम्भन प्रयोग कर सकते है।

8. उच्चाटन कर्म (शत्रु को भगाना)- किसी भी तरह कि कोई भी समश्या वो इस तरह के मन्त्रों से दूर कि जा सकती है।

जैसे कोई आपकी सम्पति और किसी भी वस्तु को जबर्दस्ती हथियाना चाहता है या आपको आपके घर में ही आकर परेशान करता है तो इस तरह के मन्त्रों से परेशान करने वालों को भगाया जा सकता है।

सावधान – सिद्ध शाबर मंत्र 100% कार्य करते है और कभी भी निस्फल नहीं होते इसीलिए अच्छी तरह और कई बार सोच समझ कर ही इनका प्रयोग करना चाहिए ।

14…स्त्री पुरुष विद्वेषण

॥ मंत्र ॥

आक ढाक दोनों बगराई।

अमुका(लड़के क नाम ) अमुकी (लड़की क नाम ) ऐसेलड़े जैसे कुकुर बिलाई।

आदेश गुरु सत्य नाम को।

विधि: ढाक कि लकडी सुखी हुई व आक के पत्ते १०८।अब प्रत्येक पते पर ऊपर दिए मन्त्र को काली स्याही सेलिख दें। अब आधी रात को हवन करें ओर १०८ बारजप करते हुआ प्रत्येक पते को अग्नि मैं स्वहा कर दें। प्यार करने वाले आज के बाद एक दुषरे को देखना भिपसंद नहि करेंगे।

15…बुरे मित्र विद्वेषण शाबरमन्त्र

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो आदेश गुरु सत्य नाम को।

बारहा सरसों।

तेरहा राई।

बाट कि मिट्ठी।

मसान कि छाई।

पटक मारुकर जलवार।

अमुक १ फूटे देखन अमुक २ द्वार।

मेरी भक्ति।

गुरु कि शक्ति।

फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।

विधि : नीचे दि गई सामग्री इकठी करो :

पिली सरसों, थोड़ी राई , थोडी मेथी, ओर आम तथाढाक कि लकडी सुखी हुई। और शमशान से थोड़ी सिराख भि ले आओ। अब हवन की तयारी करो. लकड़ियोंकि वेदी बनाओ ओर बाकि कि सामग्री को मिल लोअच्छी तरह से। अब हवन आरम्भ करो ओर २१६ आहुतियां देनी है. मन्त्र जपते हुए आहुति देते रहो। आहुति पूरी होते होते बुरे मित्र या तो खुद आपके पति य बच्चों को छोड़ देंगे या फ़िर आपके बच्चे हि उन्हे छोड़ देंगे।

16…॥ मंत्र ॥

ॐ नमो भगवती उग्ररूपिणी।

उज्जयनी महाकाली अमुक नर वशीकरण प्रदे।

कलीम जीवराशि कू आजो मेरे पगतरे करो।

मेरे वश्य वश्य न करो तो बाबा काल भैरव कि आन।

राम जि कि आन।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

विधि: ग्रहण काल में अनुष्ठान आरम्भ करना है। गणेश पूजा के बाद महाकाली पूजा करनी है तब २१ माला या जयादा का जप करो ओर अगले २१ दिन तक यही क्रिया करनी है। इस तरह मंत्र सिद्ध हो जायेगा। फिर जब भी मंत्र का उपयोग करना हो अमुक कि जगह पर पति या इच्छित का नाम रख कर १०८ बार मंत्र जप करे और महा काली कि पूजा करें। जिसका नाम प्रयोग किया है वो दौड़ा चला आएगा।

17…- मसान जगाने का शाबरमन्त्र

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो आठ खाट की लाकड़ी।

मुंज बनी का कावा।

मुवा मुर्दा बोले।

न बोले तो महावीर कि आन।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।

विधि: पहले कुछ सामग्री इकठी कर लो – लोबान,मिट्टी क दीपक ओर सरसों क तेल, १ बोतल सराब,लौंग, कपूर, ओर एक सेंट कि शीशी। अबकब्रिस्तान या शमशान में जाय कर दीपकजलाओ। बैठ कर ध्यान से इस मन्त्र का ११ मालाजप करो। डरावनी व् भयानक आवाजें आएंगीडरना मत ओर जप चालू रखना। सेंट का स्प्रे करदेना चारों और , फ़िर शराब छिड़क कर जप में लगेरहना। फिर मसान प्रकट हो जायेगा। उसकासवागत में चमेली के पुष्प कि वर्शा करना है ओरबाकी क समान भेंट मैं दें।

फिर अपनी मनोवांछित पूर्ति के लिये उनको बता दें।

18…डाकिनी शाबर मन्त्र

॥ मंत्र ॥

ॐ स्यार की ख़वासिनी ।

समंदर पार धाइ।

आव, बैठी हो तो आव।

ठाडी हो तो ठाडी आव।

जलती आ।

उछलती आ।

न आये डाकनी तो जालंधर पिर कि आन।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरे मन्त्र ईश्वरो वाचा।

विधि: किसी एकांत स्थान पर जहां चौराहा हो वहांपर, रात के समय कुछ मास मदिरा व मिट्टी कदीपक, सरसों का तेल व सरसों लेकर जाय। कालेकपडे पहन कर य नंगे होकर मन्त्र क ११ माला जपकरें, सरसों के तेल क दीपक जल कर रेख लें। अबहाथ में सरसों लेकर मन्त्र पढ़कर चारोँ दिशाओं मेंफेंक दें। और दोबारा से मन्त्र जपना आरम्भ करें,मन में संकल्प रखें कि डाकिनी आ रही है , कुछ हिदेर में दौडती, चिलाती ओर उछलती डाकनियां आजायेँगी। उनका शराब और मॉस प्रदान करना तबअपने मनोवांछित उनको बोल देना।

19……हनुमान शाबर मन्त्र

॥ मंत्र ॥

हनुमान जाग ।

किलकारी मार ।

तू हुंकारे।

राम काज सँवारे।

ओढ़ सिंदूर सीता मैया का।

तू प्रहरी राम द्वारे।

में बुलाऊँ , तु अब आ।

राम गीत तु गाता आ।

नहीं आये तो हनुमाना।

श्री राम जी ओर सीता मैया कि दुहाई।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।

विधि: २१ माला प्रत्येक मंगलवार को सूर्योदय सेपहले। ११ मंगलवार तक ये अनुष्ठान करना है। हनुमान जि कि पूजा देना है, जैसा पहले मंत्रो मैं दिया गय है. जब बाबा उपस्थित हो तो वार मांग लेना है।

20……वशीकरण ओरतांत्रिक माया कि काट ओर वापिस करना

॥ मंत्र ॥

ॐ एक ठो सरसों।

सोला राई।

मोरो पटवल को रोजाई।

खाय खाय पडे भार।

जे करै ते मरे।

उल्ट विद्या ताही पर पड़े।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

हनुमान का मंत्र साँचा।

फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।

विधि: ग्रहण काल, य दिवाली ओर होली कि रात में 21 माला जप कर मन्त्र को सिद्ध कर लो.

अब जब भि जरूरत हो तब हि एक हाथ में सरसों,नमक, ओर राई लेकर सात बार मन्त्र को जपते हुए,सात बार पीडित व्यक्ति के ऊपर से घूमा कर आगमैं झटके से डाल दें, वशीकरण या तांत्रिक कर्मवापिस उल्टा जिसने किया या करवाया है उसी परवार करेगा।

21…- हनुमान सिद्ध मन्त्र

॥ मंत्र ॥

ॐ हनुमान पहलवान।

बरस बारहा क़ा जवान।

हाथ में लड्डू मुख में पान।

आओ आओ बाबा हनुमान।

न आओ तो दुहाई महादेव गौर पार्वती कि।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

विधि: ये अनुष्ठान मंगलवार य सनिवार को सुरुकरो। मंदिर में जाकर हनुमान जि कि पूजाकरके उनका सीधा दो। सीधे में लंगोट, जनेऊ,सिंदूर ओर चोला होत है। ४० दिनों तक २१माला जपो। हनुमान जी दर्शन देंगे – मनचाहावार मांग लेना। अनुष्ठान के दौरान साफ़ औरनिष्पाप रहना है।

22……- छलछिद्र उच्चाटन

॥ मंत्र ॥

ॐ महावीर।

हनुमंत वीर।

तेरे तरकश में सौ सौ तीर।

खिण बाएं खिण दाहिने।

खिण खिण आगे होय।

अचल गुसाईं सेवता।

काया भंग न होय।

इंद्रासन दी बाँध के।

करे घूमे मसान

इस काया को छलछिद्र कांपे।

तो हनुमंत तेरी आन।

विधि: ये राम भक्त हनुमान जी के साधकों के लिए राम बाण प्रयोग है। पहले इसको सिद्ध कर लो. एकांत स्थान में १०८ बार २१ दिनों तक जप करो। मंत्र सिद्ध हो जायेगा। इसी दौरान अगर कुछ का कुछ देिखऐ दे तो घबराए नहीं . अपना जप चालु रखे।

बाद में जब भी जरूरत हो। लाल रंग के धागे में पांच तार लेकर लपेटकर इस मंत्र को पढ़ते हुए क्रम से सात गांठे लगा दो और वांछित को पहना दें। हर तरह के छलछिद्रों का उच्चाटन हो जायेगा।

23…मूठ और मारन उच्चाटन

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो आदेश गुरु को।

आगे दो झिलमिली।

पीछे दो नन्द।

रक्षा सीता राम की।

रखवारे हनुमंत।

हनुमंत हनुमंता।

आवत मूठ करो नव खंडा।

साँकर टोरो।

लोह की फारो वज्र किवाड़।

अज्जर कीले।

वज्ज्र किले।

ऐसे रोग हाथ से ठीले।

मेरी भक्ति।

गुरु की शक्ति।

फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा।

विधि: इस मंत्र को पहले १००८ बार जप कर सिद्ध करलो, अमावस्या को। फिर मूठ और मारन आदि प्रयोगोंका उच्चाटन कर सकते हो। जब भी मूठ या हंडियादेखो तब शीघ्रता से सात बार पढ़कर इसकी तरफ फूंकमार दे तो वापिस हो जाएगी।

24…॥ मंत्र ॥

ॐ नमो थाथो मोथो।

मेरा कहा कीजिये।

अमुक का गर्भ।

जाते राखि लीजिये।

गुरु कि शक्ति।

मेरी भक्ति।

फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा।

विधि: कीदृशी नमक राक्षसी कि पूजा कीजिये और काले धागे को रख लो पूजा में। अब १०८ बार जप कर के सिद्ध कर लो मंत्र को। इस मंत्र से धागे को शक्ति करत करके गर्भवती को पहना दे। गर्भ गिरेगा नहीं रूक जायेगा।

25……भूतादिक उच्चाटन

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो भगवते नारसिंघाय।

अतुल वीर पराक्रमाय।

घोर रौद्र महिषासुर रूपायै।

त्रैलोक्य डंबराय।

रौद्र छेत्र पालाय।

ह्रीं ह्रीं क्रीं क्रीं।

क्रिमितताडय ताडय।

मोहय मोहय दृभि दृभि।

छोभ्य छोभ्य आभी आभी।

साधय साधय ह्रीं ह्रदये।

आशक्तये प्रीति ललाटे बन्ध।

यही ह्रदये स्तम्भय स्तम्भय।

किलि किलि। ई ह्रीं डाकिनी।

प्रच्छादय प्रच्छादय शाकिनी।

प्रच्छादय प्रच्छादय भूतं।

प्रच्छादय प्रच्छादय अभूति अदूति स्वाहा।

राक्षसँ प्रच्छादय प्रच्छादय।

ब्रह्म राक्षसँ प्रच्छादय प्रच्छादय।

आकाशं प्रच्छादय प्रच्छादय।

सिंहिनी पुत्रम प्रच्छादय प्रच्छादय।

ऐते डाकिनी ग्रहन साधय साधय ।

अनेन मन्त्रेण।

डाकिनी शाकिनी।

भूत प्रेत पिसाचादि।

एकहिक द्वाहिक त्र्याहिक।

चतुर्थिक पंचमिक।

वातिक पैत्तिक श्लेष्मिक।

सन्निपात केसरी।

डाकिनी ग्रहादि।

मुुंच मुुंच स्वाहा।

मेरी भक्ति।

गुरु की शक्ति।

फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा।

विधि: यह एक अत्यधिक तीव्र गति का मंत्र है और बहुतजल्दी चलता है। पहले इसको १००८ बार जप करसिद्ध कर लो। फिर इसका लाभ उठाने की लिए छपरका पानी ले आओ. उस पानी को २१ बार अभिमंत्रितकरके रोगी को छींटे मारो। भूत प्रेत आदि भागजायेंगे।

अगर छपर का पानी न मिले तो मोर पंक या लोहे काचाकू को अभिमन्त्रिक करके झाड़ा लगा दो। काम होजायेगा।

26…मसानी उच्चाटन प्रयोग, लक्षण और निदान

॥ मंत्र ॥

कालिन नागिन।

शिर जटा।

ब्रह्मा खोपड़ी हाथ।

मरी मसानी।

न फिरे।

गुरु हमारे साथ।

दुहाई ईश्वर महादेव की।

गौरा पार्वती की।

दुहाई नैना योगिनी की।

विधि: इस मंत्र को सर्वप्रथम किसी ग्रहण काल में लगातार जप कर सिद्ध कर लो। तब इसका उपयोग आसानी से कर सकते हो।

श्मशान की राख ले आओ और उसे वांछित व्यक्ति को खिला दो एक कुरु योग वाले दिन या कुरुर मंत्र से अभिमंत्रित करके खिलाना है। तब उसको मसानी रोग हो जाता है। इस रोग में रोगी गुमसुम रहता है तथा दिन प्रतिदिन वह सूखता चला जाता है। वह भयानक प्रयोग प्राय: स्त्रियों के लिए किया जाता है।

जब आपको ऐसे रोग का सामना करना पड़े तब गाय के उपले की राख छान कर रख लें। फिर इस मंत्र से २१ बार अभिमंत्रित कर के उस रोगी को खिला दें। तथा पेट पर भी लगा दें ऐसा तीन बार करने से मसानी रोग का नाश हो जाता है।

27…- जल स्तम्भन

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो काला’ भैरों।

कालिका का पूत।

पगों खड़ाऊ हाथ।

गुरूजी चलो मन प्रभात।

आकतू अगुंरूं भरो तेरो न्योति।

में जहां करूं पूजो दिन सात।

जो तू मनचीता कार्य कर दे मोहि।

कुमकुम केसर कस्तूरी से पूजा करूँ तुम्हारी।

मोर मनचित्यो।

मेरा कार्य करहु।

गुरु गोरक्षनाथ कि वाचा फुरै।

शब्द सांचा।

पिंड कांचा।

फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

विधि: पहेले तो १००८ बार जप करें। पुष्य नक्षत्र में रविवार से पहले के शनिवार कि शाम को सफ़ेद आक को निमंत्रण दे आवें। और तब रविवार को उसकी जड़ उखाड़ कर ले आयें। अब इस जड़ कि खड़ाऊ बनायें। अब इस खड़ाऊ को १०८ बार मंत्र से अभिमंत्रित करें। अब इन खड़ाऊ को पहन कर पानी के ऊपर चलेंगे तो आप पानी में नहीं डूबेंगे।

28…टीका मोहन

माता अंजनी का हनुमान।

में मनाऊँ।

तू कहना मान।

पूजा दे सिंदूर चढ़ाऊ।

अमुक को रिझाऊं।

अमुक को पाऊँ।

यह टिका तेरी शान का।

वह आवे, मैं जब लगाऊं।

नहीं आवे तो राजा श्री राम कि दुहाई।

मेरा काम कर।

नहीं आवे तो अंजनी कि सेज पड़।

विधि: इस मंत्र का प्रयोग करने से पहले हनुमान जी किपूजा करके उसका चोला दें। उसके बाद १०८ बार इसमंत्र को पढ़ें। फिर मंत्र जपते हुए टिका लगाएं औरअभिलषित के समुख जायेंगे तो वह वश में हो जाये गी/ गा।

29…मिठाईवशीकरण मोहन शाबर मंत्र

ॐ नमो आदेश कामाख्या देवी को।

जल मोहूँ।

थल मोहूँ।

जंगल कि हिरनी मोहूँ।

बाट चलता बटोही मोहूँ।

पलंग बैठी रानी मोहूँ।

मोहिनी मेरो नाम।

मोहूँ जगत संसार।

तारा तरीला तोतला।

तीनों बसे कपाल।

सिर चढ़े मातु के।

दुश्मन करू पमाल।

माता मोहिनी देवी कि दुहाई।

फुरे मंत्र खुदाई।

विधि: इस मंत्र का 108 बार जप करें तब इस मंत्र सेमिठाई को अभिमंत्रित करके जिसे चाहो खिलाओ औरउसे अपना बनाओ।

30…दृस्टि स्तम्भन

॥ मंत्र ॥

ॐ नमो काल भैरव घंघरा वाला।

हाथ खडग फूलों कि माला।

चौंसठ सो योगिनी संग में चोला।

देखो खोली नजर का ताला।

राजा प्रजा ध्याव तोहिं।

सबकी दृस्टि बाँधी दे मोहिं।

में पूजो तुमको नित ध्याय।

भरी अथाई सुमिरौं तोहि।

तेरा किया सबकुछ होय।

देखूँ भैरों तेरे मंत्र कि शक्ति।

चलै मंत्र ईश्वरोवाचा।

विधि: रविवार के दिन शमशान से एक चुटकी राख ले आयें। फिर भैरों जी कि पूजा करें। अगर ईस्ट देव भैरों हो तो सोने पर सुहागा। अब २१ बार मंत्र को जपते हुए राख को फूंक मारो। अब कहीं पर भी सभा में जाकर मंत्र को जपते हुए राख को वातावरण में उड़ा दें। सभा में मौजूद सभी कि दृस्टि बांध जायेगी और सब बस वोही देख पाएंगे जो तुम दिखाना चाहते हो।

31…कड़ाही पर मंत्र प्रयोग

|| मंत्र ||

ॐ नमो जल बाँधूं।

जलवाई बाँधूं।

बाँधूं कुआँ खाई।

नौ सो गॉव का वीर बुलाऊँ।

बांधे तेल कढ़ाई।

यति हनुमंत कि दुहाई।

शब्द साँचा।

पिंड कांचा।

फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा।

विधि: बीच राह से सात कंकड़ी लेकर आओ। अब इसमंत्र को १०८ बार जप करें और फिर हर कंकड़ को ७बार मंत्र जप कर फूंक मारे अब उसके नीचे कितनी बी आग जलाएं परन्तु कड़ाही कभी भी गरम नहीं होगी।

32…मंत्र जप कि शक्तियां

तेल सो में तेल।

राजा प्रजा पावे मेल।

कछु पानी मसक लयान।

छ: सो वीर मेरे पाँव लगाव।

हाथ खडग फूलों कि माला।

जानि विजान।

गोरक्ष जाने।

मेरी गति को कहे न कोय।

हाथ पछानो, मुख धोऊं।

सुमरै निरंजन देव।

हनुमंत यति, हमारी पत राखो।

मोहिनी दोहिनी दोनों बहन आय।

मोहिनी रावल चलें।

मुख बोले तो जिव्हा मोहूँ।

आस मोहूँ।

पास मोहूँ।

सब संसार में निकलूं।

टिका देय ललाट।

आवे तो नहीं।

पकड़ बाँध ले आव।

दुहाई लक्ष्मण यति कि।

दुहाई अंजनी के पूत कि।

दुहाई निरंजन भगवन कि।

मेरी भक्ति।

गुरु कि शक्ति।

फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

विधि: इस मंत्र का प्रयोग करने के लिए दीपावली किरात को एक कांसे कि थाली में ११ दीपक जला कर रख दें। तब एक छिद्र रहित भोजपत्र पर चमेली के तेलमें सिंदूर मिलाकर काजल बनाये और उस से दिया गया मन्त्र लिख दें। इसका १०८ बार जप करें। इसके बादजिसकी तरफ मुख करके इस मंत्र के जप करेंगे वो ही वशीभूत हो जायेगा।

33…5 अक्षर का प्रभावी आकर्षण मंत्र : इसे पढ़ने से पत्थरदिल भी होगा आकर्षित

यूं तो मंत्र और तंत्र मन के विश्वास पर आजमाए जाते हैं लेकिन कुछ मंत्रों के बारे में तांत्रिकों का दावा है कि यह असर करते हैं और तत्काल असर करते हैं। जैसे यह मंत्र जो किसी व्यक्ति विशेष को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।

तांत्रिक मान्यता है कि जिस व्यक्ति को आकर्षित करना हो उसका ध्यान कर 15 दिन तक नित्य इस मंत्र का जाप करें, तो कैसा भी पत्‍थरदिल प्राणी हो, अवश्य आ‍कर्षित होगा।

* आकर्षण मंत्र 1

- ॐ हुं ॐ हुं ह्रीं।

* आकर्षण मंत्र 2

- ॐ ह्रों ह्रीं ह्रां नम:।

इस मंत्र को नित्य 10 हजार बार 15 दिन तक जाप करें तो वांछित व्यक्ति अवश्य ही आकर्षित होगा।

34……”ॐ नमो भगवते, विचित्र-वीर-हनुमते, प्रलय-कालानल-प्रभा-ज्वलत्-प्रताप-वज्र-देहाय, अञ्जनी-गर्भ-सम्भूताय, प्रकट-विक्रम-वीर-दैत्य-दानव-यक्ष-राक्षस-ग्रह-बन्धनाय, भूत-ग्रह, प्रेत-ग्रह, पिशाच-ग्रह, शाकिनी-ग्रह, डाकिनी-ग्रह ,काकिनी-ग्रह ,कामिनी-ग्रह ,ब्रह्म-ग्रह, ब्रह्मराक्षस-ग्रह, चोर-ग्रह बन्धनाय, एहि एहि, आगच्छागच्छ, आवेशयावेशय, मम हृदयं प्रवेशय प्रवेशय, स्फुट स्फुट, प्रस्फुट प्रस्फुट, सत्यं कथय कथय, व्याघ्र-मुखं बन्धय बन्धय, सर्प-मुखं बन्धय बन्धय, राज-मुखं बन्धय बन्धय, सभा-मुखं बन्धय बन्धय, शत्रु-मुखं बन्धय बन्धय, सर्व-मुखं बन्धय बन्धय, लंका-प्रासाद-भञ्जक। सर्व-जनं मे वशमानय, श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वानाकर्षयाकर्षय, शत्रून् मर्दय मर्दय, मारय मारय, चूर्णय चूर्णय, खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्य-सिद्धिं कुरु कुरु, मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्र-वीर-हनुमते। मम सर्व-शत्रून् भस्मी-कुरु कुरु, हन हन, हुं फट् स्वाहा।।”

35…व्यापार वृद्धि हेतु अनुभूत प्रयोग

लाल रंग का आसन बिछा लें और उस पर बैठ कर सामने आधा मीटर लाल कपड़ा किसी चौकी पर बिछाकर उस पर काले तिलों की ढेरी लगा दें l देशी घी का दीपक जलाएं और दीपक के सामने 7 साबुत लौंग, 7 बड़ी इलायची तथा 7 कालीमिर्च रख दें l उसके बाद कहें “अगर किसी ने मेरा व्यापार बांधा हो तो वह दूर हो जाये और व्यापार बढ़ने लगे” यह बोलने के बाद निम्न लिखित मंत्र का 5 माला का जप करे- llऊँ हनुमंत वीर रखो धीर, करो काम, व्यापार बढ़े, तंत्र दूर हो, होना टूटे, ग्राहक बढ़े, कारज सिद्ध होय, न होय तो अंजनी माता की दुहाई फिरे शब्द सांचा पिण्ड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा ll
इसके बाद सारी सामग्री उसी कपड़े पर इकट्ठी कर लें और वह पोटली किसी निकटतम चौराहे पर रखकर पुनः वापय से आएं और व्यापार स्थल पर रख दें l

36…धनदा रति प्रिया यक्षिणी साधना

नाम से ही समझ में आता है की ये यक्षिणी साधक की सारी आर्थिक तंगी को दूर कर उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है.अगर ये प्रसन्न हो जाये तो साधक कुबेर की भाती जीवन जीता है.

विधि:
साधना किसी भी शुभ दिन से शुरू करे या शुक्रवार से,शिवरात्रि में अच्छा मुहरत है.समय रात्रि दस के बाद का हो. आसन वस्त्र पीले या लाल हो. दिशा-उत्तर ,अपने सामने बजोट पर उसी रंग का वस्त्र बिछाये जो आपने पहना है.एक ताम्र पात्र में बीज मंत्र ” हूं ” लिखे कुमकुम से और उसके ऊपर एक तील के तेल से भरा हुआ दीपक रखे।अब यथा संभव गुरु पूजन तथा गणेश पूजन करे,कोई भी शिवलिंग स्थापित करे वो न हो तो चित्र रख ले.कोई भी मिठाई या गुड अर्पण करे.दीपक का पूजन करे।तथा संकल्प ले की
“में ये प्रयोग अपनी आर्थिक कष्ट मिटाने हेतु कर रहा हु,धनदा रति प्रिया यक्षिणी मुझ पर प्रस्सन हो कर मुझे आर्थिक लाभ प्रदान करे”.
इसके बाद स्फटिक माला,रुद्राक्ष माला या मूंगा माला से,ॐ नमः शिवाय की एक माला करे और यक्षिणी मंत्र की कम से कम ११ माला जाप करे और उसके बाद पुनः एक माला ॐ नमः शिवाय की करे।
इस तरह ये एक दिवस का प्रयोग आपको जीवन में कई लाभ प्रदान करेगा
।साधक चाहे तो अधिक जाप भी कर सकता है.प्रसाद स्वयं खा ले.नित्य एक माला जाप करते रहे तो जीवन में आने वाले आर्थिक परिवर्तन को आप स्वयं देख लेना।जाप दीपक की और देखते हुए करे और दीपक का भी सामान्य पूजन करे,यक्षिणी का स्वरुप मानकर।यदि इसी साधना को लगातार ४० दिन किया जाये तो प्रत्यक्षीकरण हो जाता है.उसमे प्रतिदिन आप २१ माला करे.यदि आप उपरोक्त विधान नहीं कर रहे है तो मात्र गुरु चित्र की और देखते हुए ही जाप कर ले तो अनुकूलता मिलने लगती है. इस साधना की यही खास बात है की इसमें ज्यादा इसमें ज्यादा समय और धन नहीं खर्च करना पड़ता ।।

मंत्र:
ॐ हूं ह्रीं ह्रीं ह्रीं धनदा रति प्रिया यक्षिणी इहागच्छ मम दारिद्रय नाशय नाशय सकल ऐश्वर्य देहि देहि हूं फट स्वाहा।। ।

37…साबर मोहनी जाल वशीकरण

साबर तंत्र में इस साधना को मोहनी जाल के नाम से जाना जाता है | इसका प्रयोग कभी विफल नहीं जाता !इस से जहाँ अपने उच्च अधिकारी को अपने अनुकूल बना सकते है | वही अपने आस पास के वातावरण को अपने विरोध होने से रोक सकते है | अपनी झगड़ालू पत्नी जा पति को भी अपने वश में कर उसे अनुकूलता दे सकते है | कई लोग इस प्रयोग का गलत इस्तेमाल कर लेते है | उन्हें जही कहता हू कोई भी ऐसा कार्य ना करे जो समाजिक दृष्टि से अनुकूल ना हो | सिर्फ आवश्कता पड़ने पर ही यह प्रयोग करे मुझे कई सवाल आये वशिकर्ण वारे पर मैं ज्यादा करके टाल देता हू | जहा भी यह प्रयोग जिज्ञाशा के लिए दे रहा हू | इस लिए इसे सद्कार्य हेतु इस्तेमाल करे नहीं तो शक्ति कई वार विपरीत स्थिति भी पैदा कर देती है | मैंने काफी समय पहले साबर शिव तंत्र पड़ा था | उस में यह प्रयोग दिया था | इसे अनुभूत किया यह घर से भी साध्य व्यक्ति को भी बुला लेता है | ऐसा परखा हुआ है | मोहनी जाळ फेकना आसन है, मगर उठाना उतना ही मुश्किल इस लिए इसे इस्तेमाल करने से पहले पुनः सोच विचार कर ले | इस का प्रयोग अति शक्तिशाली है | इस से अपने प्रतिबंधिओ को अपने अनुकूल कर मन चाहा कार्य संपन करा सकते है | यह प्रयोग पहली वार आपके समक्ष ला रहा हू |

★मंत्र गुप्त है।

साधना विधि –
१. इसे लाल वस्त्र धारण कर करना चाहिए |
२. आसन कुषा का जा कबल का ले सकते है |
३. दिशा उतर रहेगी |
४. मन्त्र जाप पाँच माला करना है | इस के लिए लाल चन्दन जा कुंकुम की माला जा काले हकीक की माला इस्तेमाल कर सकते है |
५ तेल का दीपक साधना काल में जलता रहेगा जब तक आप मन्त्र जाप करते है | दीपक में तिल का तेल इस्तेमाल करे तो जयादा उचित है |
६. सोलह किस्म का सिंगार ले आये उसे वेजोट पे लाल वस्त्र विछा के उस पर रख दे और सात किस्म की मिठाई भी रख दे इस के इलावा छोटी इलाची और एक शीशी इतर पास रखे और एक मीठा पान का बीड़ा रख दे |
७. साधना के बाद छोटी इलाची और इतर को छोड़ कर शेष समग्री किसी निर्जन स्थान पे उसी लाल वस्त्र में बांध कर छोड़ दे अथवा नदी में प्रवाहित करदे |
८. वशीकरन के लिए एक इलाची ७ वार यह मन्त्र पढ़ किसी को खिला दे |
९. जब आप किसी अधिकारी से मिलने जा रहे हो जो आपका कार्य नहीं कर रहा तो थोरा इतर लगा के चले जाये वोह आपकी बात जरुर सुनेगा |
१०. इसे २१ दिन करना है और मन शुद रखे |
११. सारी समग्री लाल वस्त्र पे रख के उस में तेल का दिया किसी पात्र में रख कर लगा दे और मन्त्र जाप शुरू करने से पहले गणेश पूजन गुरु पूजन और श्री भैरव पूजन अनिवर्य है |
१२. उस दिये पे एक मिटी के पात्र पर थोरा घी लगा के दिये से थोरा उचा रख सकते है | काजल उतरने के लिए !उस काजल से तीव्र संमोहन होता है | उसे आँखों में लगा के जिसे भी देखेगे समोहित हो जायेगा !

साधना करते वक़्त ख्याल रखे कई वार मोहिनी भयानक रूप में साहमने आ जाती है | जिस के काले वस्त्र होते है और रंग काला होता है | होठो पे ढेर सारी सुर्खी लगी होती है | आंखे बिजली की तरह चमक रही होती है | ऐसी हालत में डरे न नहीं तो मेहनत बेकार हो जाती है | और ना ही उसकी आंखो में देखने का प्रयत्न करे नहीं तो आप समोहित हो जाएगे और साधना रुक जाएगी बहुत धार्य से काम ले जब तक वोह वर मांगने को न कहे तब तक बोले न सिर्फ अपने मंत्र जप पे ध्यान दे | जब आपका बचन हो जाए तो उसे कहे के जब भी मैं आपको याद कर इस मंत्र का जप कर जिसे समोहित करना चाहु कर सकु आप ऐसा वर दे इस से समोहन की शक्ति आपको दे देगी उसे सिंगार मिठाई पान आदि प्रदान करे वोह खुश हो कर आपको सकल स्मोहन का बचन दे देगी अगर ऐसा न भी हो तो भी मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | ऐसा सिर्फ इस लिए लिखा है के मेरा ऐसा अनुभव है | जो मैं समझता हु किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है | पर अक्सर मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | साधना के बाद आप इसके प्रयोग की पुष्टि कर सकते है | भूल कर भी गलत कार्यओ में इसका इस्तेमाल न करे इस का कई वार विपरीत परिणाम भी भुगतना पै सकता है |

38…शक्ति सवारी आज मैं आप सब साधको को बताऊंगा की किस प्रकार स्वयं के अंदर शक्ति को आवाहन कर सवारी लाना सम्भव है , बहुत से साधकों का मुझसे यह प्रश्न रहता है की गुरु जी कैसे सवारी बुलाऊँ माता की या भैरव की तो सर्व प्रथम पूर्ण रूप से सवारी आएगी तो मगर अंतः करण रूप से समस्त शक्ति हमारे अंदर ही है । और वो अंदर अपने उसे रूप को सवारी के माध्यम से जाग्रत कर देंगी । जब वो शक्ति पास होगी तो आपके अंदर के गूढ रहस्यों से वो आपके अंदर भी जाग्रत होगी । बाहरी रूप से सवारी सम्भव नही क्योंकि इतना तेज होता है महाशक्ति में की साधक का निधन हो सकता है उस तेज से , कैसे आह्वान करे स्वयं को सवारी बनाये शक्ति की कैसे ? सर्व प्रथम आपकी उस शक्ति पर आस्था हो आपने उसका अधिक जाप किया हो , जिससे आप खो सकें उनके ध्यान में उस शक्ति के ध्यान में जिसकी सवारी बुलानी है इसके बाद एक अद्भुत वाद्य यन्त्र होता है जिसे उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में ढाँक के नाम से जाना जाता है जो डुग डुग डग डग की विलक्षण ध्वनि निकलती है । इसके अंदर की कम्पन तरंगें ध्वनि से जिस शक्ति को बुलाओ उसे अपने ध्वनि से तुरंत आकर्षित करती है और वो शक्ति आ जाती है । इस यंत्र का प्रयोग किसी के अंदर छुपी चाह अच्छी हो या बुरी शक्ति उसके सामने इसे बजा कर शह के द्वारा उसे मस्ती में कर दिया जाता है जिससे वो शक्ति सवारी के रूप में खेलना शुरू कर देती है , खेलने का तात्पर्य वह जोर से चीखेगा और नाचने या भविष्यवाणी करने लगेगा । इसी प्रकार यदि आप में से तीव्र इच्छा है जिन साधको में वो इसका प्रयोग कर स्वयं के उपार सवारी ला सकते है । इस क्रिया को रात्रि के समय चौथ को करने से या पूर्णिमा को पूर्ण परिणाम मिलता है । इस ध्वनि यन्त्र के साथ इसी तरह के ध्वनि मंत्र होते है जिन्हें गॉट के नाम से बोला जाता है ग्रामीण भाषा में ……ये सब इतना अद्भुत होता है जिस जिस के अंदर ये ध्वनि जाती है उसके भी सिहरन होने लगती है , और अंदर छुपी शक्ति सवारी के लिए मचलने लगती है शरीर में कम्पन और आनंद रोमांच आने लगता है । अद्भुत है ये सब मेरे स्वयं के ऊपर सवारी का आवाहन हुआ था जो बड़ा रोमांचक था मनी धस्माना जी और भी बड़े बड़े साधक थे उस समाय रात्रि के 2 बजे थे जैसे ही वो शराब की धार महाकाल भैरव को दे रहे थे अद्भुत था सब जो घटित हुआ सब प्रमाण है उस समाय के । वो साधक जिनमे साधना के समय विलक्षण अनुभव होते है । वो इसके सवारी को तुरंत आह्वान कर सकते है
।।

39……हनमान चूटकी मंत्र साधना.. इस मंत्र से सभी अला बलाओ से सूरक्षा होती है यहा तक की पक्की मसानी भी इस मंत्र के मात्र 3 बार जाप कर चूटकी बजाने मात्र से दूर हो जाती है,इस साधना को पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का निचम का पालन कर साधना की जाती,अगर आप किसी कारणवश इस साधना को करने मे असमर्थ है तो सिध्द अभिमंत्रित हनुमान यंत्र हमारे संस्थान से मंगवा सकते है जो आपकी 100% तांत्रीक क्रियाओ से रक्षा करता है , यह मंत्र मुझे एक महात्मा की कृपा से मिला है | इस लिए इसे आप स्व परख ले और लाभ देख सकते है | किसी भी तरह की आलोचना से मैं हमेशा दूर ही रहता हूँ| सिद्धि कोई भी हो साधक की मनोदशा पर निर्भर करती होती है | यह मंत्र आपको किसी किताब से नहीं मिलेगा क्यू के ऐसे मंत्र किताबों में बहुत कम मिलते है |

साधना विधि —
इसे आप दीपावली के दिन अथवा किसी भी सामान्य रात्रि में कभी भी सिद्ध कर सकते है | किन्तु 12 से 1 बजे तक का समय न चुने, और कोई भी टाइम चलेगा | आसन कोई भी ले सकते हैं। वैसे कुशा का आसन सर्वोत्तम है |
इस साधना को करने के लिए पास किसी भी हनुमान जी के मंदिर में जाये | एक सरसों के तेल का दिया जला दे जो जब तक आपका मंत्र जप पूरा न हो दिया जलता रहना चाहिए | इस लिए एक बड़ा दिया ले लें | सवा मीटर लाल कपड़ा जो आपको हनुमान जी को लगोट के रूप में अर्पण करना है और सवा किलो लड्डू किसी भी तरह के ले ले | एक बात हमेशा याद रखे हनुमान जी को भोग अर्पण करते समय हमेशा एक तुलसी दल भोग के उपर रख देना चाहिए तभी उनकी क्षुधा शांत होती है |माला मूँगे की अथवा रुद्राक्ष की ले | आपको एक माला मंत्र जाप करना है | प्रसाद व लाल वस्त्र वही हनुमान जी के चरणों में छोड़ दे और अपनी व परिवार की रक्षा के लिए प्रार्थना करे और घर आ जाए |

साबर चुटकी मंत्र-
ॐ नमो गुरु जी चुटकी दाये चुटकी बाये,
चुटकी रक्षा करे हर थाएं |
बजर का कोठा अजर कबाड़ ,
चुटकी बांधे दसो दुयार ||
जो कोई घाले मुझ पे घाल उलटत देव वही पर जाए |
हनुमान जी चुटकी बजाए ,
राम चंदर पछताये, सीता माता भोग बनाया हनुमान मुसकाये |
माता अंजनी की आन ,
चुटकी रक्षा करो तमाम |
जय हनुमान, जय हनुमान, जय हनुमान ||

प्रयोग विधि –
सिद्ध करने के बाद जब भी जरूरत हो एक वार मंत्र पढ़ के तीन वार चुटकी वज़ा दे | एक वार दाये एक वार बाये एक वार सिर के उपर उसी वक़्त रक्षा होगी | …..

40……ये साधना है शोधनी की जो की यछ और यछनी की सन्तान है ये आपको आत्माओ को देखने और शक्तियो से बात करने की छमता आप मे विकशित करगी!

मंत्र- ऊँ शोधनी दैव्यायै प्रिय प्रिय स्वाहा
विधी- १०८ मंत्र रूद्राछ की माला से
१००८ आहुति शाकिल्या से
अनुभूति साधना के समय किसी भी समय सारे शरीर मे करेन्ट सा दौडने लगे तो समझना चाहिये देवी आ गयी !
य सिर मे दर्द होगा बाँकि किसी किसी की अनुभूति भिन्न हो सकती है!

41…ह्रां ह्रीं कालिके घोर दृष्टे रुधिर प्रिये
रुधिर पूर्ण वक्त्रे रुधिरावृतस्तनि मम सर्व शत्रु
खादय खादय , हिंरत्र हिंरत्र, मारय मारय , भिन्धि भिन्धि, छिन्धि छिन्धि, उच्चाटय उच्चाटय , विंद्रावय विंद्रावय , शोषय शोषय , स्वाहा रां रीं कराये मदी शत्रुन संमर्दय स्वाहा
के जग जय जय जय किर किर, किट किंट, मर्द मर्द , मोहय मोहय ,हर हर , मम् रिपुन ध्वंस ध्वंस , भक्ष त्रोटय त्रोटय यातुधानिका चामुंडा
सर्व जनान राजपुरषान स्त्रिया मम् कुरु कुरु
आश्वन् गजान दिव्य कामिनी पुत्रान् राज्यम श्रियं देहि देहि नूतन नूतन धान्यम् धानम यक्ष रक्ष
क्षां क्षीं क्षुं क्षैं क्षौ क्षं क्षः स्वाहा ।।
जय जय माँ काली कपाली चामुंडा माँ

42…यज्ञ कुंड के प्रकार :-

यज्ञ कुंड मुख्यत: आठ प्रकार के होते हैं और सभी का प्रयोजन अलग अलग होताहैं ।
1. योनी कुंड – योग्य पुत्र प्राप्ति हेतु ।
2. अर्ध चंद्राकार कुंड – परिवार मे सुख शांति हेतु । पर पतिपत्नी दोनों को एक साथ आहुति देना पड़ती हैं ।
3. त्रिकोण कुंड – शत्रुओं पर पूर्ण विजय हेतु ।
4. वृत्त कुंड – जन कल्याण और देश मे शांति हेतु ।
5. सम अष्टास्त्र कुंड – रोग निवारण हेतु ।
6. सम षडास्त्र कुंड – शत्रुओ मे लड़ाई झगडे करवाने हेतु ।
7. चतुष् कोणास्त्र कुंड – सर्व कार्य की सिद्धि हेतु ।
8. पदम कुंड – तीव्रतम प्रयोग और मारण प्रयोगों से बचने हेतु ।

43…यह मंत्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में साधक की रक्षा करता है । कोई भी व्यक्ति इसे सिद्ध करके स्वयं को
सुरक्षित कर सकता है । जिसने इसे सिद्ध कर लिया हो, ऐसा व्यक्ति कहीं भी जाए, उसको किसी प्रकार की शारीरिक हानि की आशंका नहीं रहेगी । केवल आततायी से सुरक्षा ही नहीं, बल्कि रोग-व्याधि से मुक्ति दिलाने में भी यह मंत्र अद्भुत प्रभाव दिखाता है । इसके अतिरिक्त किसी दूकान या मकान में प्रेत-बाधा, तांत्रिक-अभिचार प्रयोग, कुदृष्टि आदि कारणों से धन-धान्य, व्यवसाय आदि की वृद्धि न होकर सदैव हानिकारक स्थिति हो, ऐसी स्थिति में इस मंत्र का प्रयोग करने से उस द्थान के समस्त दोष-विघ्न और अभिशाप आदि दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं ।

मन्त्रः-
“ॐ नमो आदेश गुरु को। ईश्वर वाचा अजपी बजरी बाड़ा, बज्जरी में बज्जरी बाँधा दसौं दुवार छवा और के घालो तो पलट बीर उसी को मारे । पहली चौकी गणपति, दूजी चौकी हनुमन्त, तिजी चौकी भैंरो, चौथी चौकी देत रक्षा करन को आवे श्री नरसिंह देवजी । शब्द साँचा पिण्ड काँचा, ऐ वचन गुरु गोरखनाथ का जुगोही जुग साँचा, फुरै मन्त्र ईशवरी वाचा ।”

विधिः-
इस मंत्र को मंत्रोक्त किसी भी एक देवता के मंदिर में या उसकी प्रतिमा के सम्मुख देवता का पूजन कर 21 दिन तक प्रतिदिन108बार जप कर सिद्ध करें ।
प्रयोगः-
साधक कहीं भी जाए, रात को सोते समय इस मंत्र को पढ़कर अपने आसन के चारों ओर रेखा खींच दे या जल की पतली धारा से रेखा बना ले, फिर उसके भीतर निश्चित होकर बैठे अथवा सोयें ।

रोग व्याधि में इस मंत्र को पढ़ते हुए रोगी के शरीर पर हाथ फेरा जाए तो मात्र सात बार यह क्रिया करने से ही तत्काल वह व्यक्ति व्याधि से मुक्त हो जाता है ।
घर में जितने द्वार हो उतनी लोहे की कील लें । जितने कमरे हों, प्रति कमरा दस ग्राम के हिसाब से साबुत काले उड़द लें । थोड़ा-सा सिन्दूर तेल या घी में मिलाकर कीलों पर लगा लें । कीलों और उड़द पर 7-7 बार अलग-अलग मंत्र पढ़कर फूंक मारकर अभिमंत्रित कर लें । व्याधि-ग्रस्त घर के प्रत्येक कमरे या दुकान में जाकर मंत्र पढ़कर उड़द के दाने सब कमरे के चारों कोनों में तथा आँगन में बिखेर दें और द्वार पर कीलें ठोक दें ।

बालक या किसी व्यक्ति को नजर लग जाए, तो उसको सामने बिठाकर मोरपंख या लोहे की छुरी से मंत्र को सात बार पढ़ते हुए रोगी को झाड़ना चाहिए । यह क्रिया तीन दिन तक सुबह-शाम दोनों समय करें ।

44…यह मंत्र अपने आप मे कई रहस्य लिये हुये है
विधान मे परिवर्तन करने पर शत्रु को पीडा दे सकता है मगर यहाँ आपके लिये रक्षा मंत्र के रूप मे विधान दे रहे है ।
(कालिका रक्षा कवच )
ॐ कालिका खड़ग खप्पड़ लिये ठाढी !
जोत तेरी है निराली !
पीती भर भर रक्त पियाली !
कर भक्तों की रखवाली !
न कर रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई !
इस मंत्र को ११ बार पढ के अपने सीने पे फूकने पे
सब तरह से रक्षा होती है।

45…शाबर धूमावती साधना :—-

दस महाविद्याओं में माँ धूमावती का स्थान सातवां है और माँ के इस स्वरुप को बहुत ही उग्र माना जाता है ! माँ का यह स्वरुप अलक्ष्मी स्वरूपा कहलाता है किन्तु माँ अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एक मान्यता के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया तो उस यज्ञ में शिव जी को आमंत्रित नहीं किया ! माँ सती ने इसे शिव जी का अपमान समझा और अपने शरीर को अग्नि में जला कर स्वाहा कर लिया और उस अग्नि से जो धुआं उठा )उसने माँ धूमावती का रूप ले लिया ! इसी प्रकार माँ धूमावती की उत्पत्ति की अनेकों कथाएँ प्रचलित है जिनमे से कुछ पौराणिक है और कुछ लोक मान्यताओं पर आधारित है !
नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध योगी सिद्ध चर्पटनाथ जी माँ धूमावती के उपासक थे ! उन्होंने माँ धूमावती पर अनेकों ग्रन्थ रचे और अनेकों शाबर मन्त्रों की रचना भी की !
यहाँ मैं माँ धूमावती का एक प्रचलित शाबर मंत्र दे रहा हूँ जो बहुत ही शीघ्र प्रभाव देता है !
कोर्ट कचहरी आदि के पचड़े में फस जाने पर अथवा शत्रुओं से परेशान होने पर इस मंत्र का प्रयोग करे !
माँ धूमावती की उपासना से व्यक्ति अजय हो जाता है और उसके शत्रु उसे मूक होकर देखते रह जाते है !

|| मंत्र ||

ॐ पाताल निरंजन निराकार
आकाश मंडल धुन्धुकार
आकाश दिशा से कौन आई
कौन रथ कौन असवार
थरै धरत्री थरै आकाश
विधवा रूप लम्बे हाथ
लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव
डमरू बाजे भद्रकाली
क्लेश कलह कालरात्रि
डंका डंकिनी काल किट किटा हास्य करी
जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्ते
जाया जीया आकाश तेरा होये
धुमावंतीपुरी में वास
ना होती देवी ना देव
तहाँ ना होती पूजा ना पाती
तहाँ ना होती जात न जाती
तब आये श्री शम्भु यती गुरु गोरक्षनाथ
आप भई अतीत
ॐ धूं: धूं: धूमावती फट स्वाहा !

|| विधि ||

41 दिन तक इस मंत्र की रोज रात को एक माला जाप करे ! तेल का दीपक जलाये और माँ को हलवा अर्पित करे ! इस मंत्र को भूल कर भी घर में ना जपे, जप केवल घर से बाहर करे ! मंत्र सिद्ध हो जायेगा !

|| प्रयोग विधि १ ||

जब कोई शत्रु परेशान करे तो इस मंत्र का उजाड़ स्थान में 11 दिन इसी विधि से जप करे और प्रतिदिन जप के अंत में माता से प्रार्थना करे –
“ हे माँ ! मेरे (अमुक) शत्रु के घर में निवास करो ! “

ऐसा करने से शत्रु के घर में बात बात पर कलह होना शुरू हो जाएगी और वह शत्रु उस कलह से परेशान होकर घर छोड़कर बहुत दुर चला जायेगा !

|| प्रयोग विधि २ ||

शमशान में उगे हुए किसी आक के पेड़ के साबुत हरे पत्ते पर उसी आक के दूध से शत्रु का नाम लिखे और किसी दुसरे शमशान में बबूल का पेड़ ढूंढे और उसका एक कांटा तोड़ लायें ! फिर इस मंत्र को 108 बार बोल कर शत्रु के नाम पर चुभो दे !
ऐसा 5 दिन तक करे , आपका शत्रु तेज ज्वर से पीड़ित हो जायेगा और दो महीने तक इसी प्रकार दुखी रहेगा !

नोट – इस मंत्र के और भी घातक प्रयोग है जिनसे शत्रु के परिवार का नाश तक हो जाये ! किसी भी प्रकार के दुरूपयोग के डर से मैं यहाँ नहीं लिखना चाहता ! इस मंत्र का दुरूपयोग करने वाला स्वयं ही पाप का भागी होगा !

46….आज कल दुष्ट तथा क्रोंध के आवेश मे अपनी शक्तियों का दुरउपयोग करने वालों की शख्या बढती जा रही जो किसी पर भी तंत्रिक प्रयोग कर के
कोई शैतानी शक्ति सवार करा देते है !
जिसके फल स्वरूप व्यक्ति को लगता है जैसे कोई उसके सिर पर सवार है या शारीरित पीडा दे रहा है !
इसके बचाव के लिये आपके एक अति दुर्लभ प्रयोग दे रहे है हम जो न किसी किताब मे बै न कही और क्योकि समयाचार्य साधक ही ब्रह्माण्ड मे गूंज रहे मंत्र सुन सकता है ये वही से है !
जन कल्याण के लिये ये प्रयोग करते ही १० मिनट मे आप खुद को बहुत अच्छा महसूस करेगे यदि आप पे वाकई मे कोई तंत्रिक अभिचार है ,
(तंत्र बाधा मुक्ति तंत्र)
मंत्र – ॐ अहम् घूर घूर स्वाहा
विधी- एक पात्र मे शुद्ध जल ले धूप जला कर जल के पात्र को धूप अगरबत्ती दिखाते हुये ११ बार निम्न मंत्र से आँखे बन्द कर ध्यान कर के अभिमंत्रित करे !
और शिव जी से प्रार्थना करे अपने कष्ट निवारण की आप तुरन्त ठीक हो जायेगे और ११ दिन तक किसी का भी तंत्र प्रयोग आप को नुकसान नही पहुचा सकता है !
शिव शम्भू के प्रिय एवम् गुप्त गण घूर देव की ११ दिन तक की चौकी आपकी रक्षा करेगी !

47…शाबर हनुमान साधना :-

ये साधना आप किसी भी मंगलवार से आरंभ कर सकते हे । साधना सुरू करने से पहले साधना शुद्ध जल से स्नान कर के साधना के लिए लाल वस्त्र एवं लाल आसान ओर लाल रंग का ही पोशाक पहने । इस साधना मे साधक को 11 दिन मंत्र का जाप करना हे । ओर इस तरह साधक को रोज 108 मंत्र यानि रोज 1 माला मंत्र का जाप करना हे । साधना के दौरान धूप, दीप, ओर खुशबूदार अगरबत्ती जलाए ओर ये साधना रात के समय ने ही करे ।

मंत्र :-

ओम गुरूजी हनुमानजी कावल कुंडा हाथी
खप्पर छडी मसान गुग्गल धुप जाप तेरा,
तेरा रूप शाकिनी बांधू डाकिनी बांधू भूत को
बांधू अटल को बांधू पाताल टेकरी को बांधू
हनुमानजी के रोचना को बांधू, घर घर जाओ,
ना माने चार गदा लगाओ, जेसे सीता माँ के
सतको राखे वैसे मेरे सतको रखो, आवो आवो
हनुमान घट्ट पिंड में समाओ हनुमान, हनुमान
बेठे रानी आई, गदा बेठी, राजा

ये मंत्र बहुत ही शक्तिशाली हे ओर इस साधना करने से साधना को हर पल आपने पास भगवान हनुमान को अपने पास महसूस पाओगे । और साधक हनुमान जी की कृपा से सब खतरों से बच जाएगी

48…रोग से मुक्ति का बगलामुखी प्रयोग

प्रयोग सामग्री :-

एक मट्टी कि कुल्हड़ (मटका) छोटा सा,सरसों का तेल ,काले तिल,सिंदूर,काला कपड़ा

( प्रयोग विधि )

शनिवार के दिन शाम को ४ या ४:३० बजे स्नान करके साधना मे प्रयुक्त हो जाये.मट्टी कि कुल्हड़ मे सरसों कि तेल को भर दीजिये।उसी तेल मे ८ काले तिल डाल दीजिये.और काले कपडे से कुल्हड़ का मुह को बंद कर दीजिये.अब ३६ अक्षर के बगलामुखी मंत्र का १ माला जाप कीजिये.और कुल्हड़ के उपर थोड़ा सा सिंदूर डाल दीजिये.और माँ बगलामुखी से भी रोग बाधा मुक्ति कि प्रार्थना कीजिये.और एक माला निम्मन मंत्र का जाप करें:

ॐ ह्लीं (ह्लीम्) श्रीं (श्रीम्) ह्लीं (ह्लीम्) मम(अमुक) रोग बाधा नाशय नाशय फट् ||

मंत्र जाप समाप्ति के बाद कुल्हड़ को जमींन में गाड़ दीजिये। जमीन में गड्ढा प्रयोग से पहिले ही खोद लें।यह प्रयोग स्वंय के लिए हो तो मन्त्र में मम शब्द का उच्चारण करें और किसी अन्य के लिए कर रहे है तो मन्त्र में मम की जगह व्यक्ति का नाम बोले और उस बीमार व्यक्ति से कुल्हड़ को स्पर्श करवाते हुये कुल्हड़ को जमींन मे गाड़ दीजिये और स्वंय या बीमार व्यक्ति के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करे।कुछ परिस्थितियों मे एक शनिवार मे अनुभूतिया कम हो तो यह प्रयोग आगे भी किसी अन्य शनिवार को कर सकते हैं।

49…आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सर्व मनोकामना पूर्ण मंत्र
या उस्ताद बैठो पास, काम आवै रास. ला इलाही लिल्ला हजरत वीर कौशल्या वीर, आज मज रे जालिम शुभ करम दिन करै जञ्जीर. जञ्जीर से कौन-कौन चले? बावन वीर चलें, छप्पन कलवा चलें.
चौंसठ योगिनी चलें, नब्बे नारसिंह चलें. देव चलें, दानव चलें. पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें. भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले. नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है.
एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है. चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा. गुरु का शब्द साँचा
विधि
उक्त मन्त्र का जप शुक्ल-पक्ष के सोमवार या मङ्गलवार से प्रारम्भ करे. कम-से-कम 5 बार नित्य करे. अथवा 21 , 41 या 108 बार नित्य जप करे. ऐसा 40 दिन तक करे. 40 दिन के अनुष्ठान में मांस-मछली का प्रयोग न करे. जब ‘ग्रहण’ आए, तब मन्त्र का जप करे.
यह मन्त्र सभी कार्यों में काम आता है. भूत-प्रेत-बाधा हो अथवा शारीरिक-मानसिक कष्ट हो, तो उक्त मन्त्र 3 बार पढ़कर रोगी को पिलाए. मुकदमे में, यात्रा में-सभी कार्यों में इसके द्वारा सफलता मिलती है।

50…आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ मां कालिका का मारण मंत्र
ओम काली काली महाकाली, इंद्र की बेटी बम्हा की साली, जा बैठी पीपल की डाली हाली हिलावे घाली घलाव , मेरा चोर हरामखोर हार की थाली शिशको पसारा, माथे जटा कारे महाकाली ,मेरी भक्ति गुरु की शक्ति देखो महाकाली तेरे मंत्र की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा
विधी
इस मंत्र का विधान 41 दिन का है इस मंत्र का जाप शमशान में मध्य रात्रि के समय मास निद्रा बलि आदि का प्रबंध कर गुरु दीक्षा निर्देश के अनुसार करें इस मंत्र को बिना गुरु के निर्देश के ना करे।।

51…रुके हुए कार्य व रोजगार प्राप्ति हेतु मां काली का मंत्र
ओम जय अंबा भू की रानी काली माता कालका काला भैरव है मतवाला , हनुमान चिल्ले वाला मेरा कार्य ना सवारों तो दोहाई गुरु गोरखनाथ की अंजनी का पुत्र हनुमान साजे शब्द सांचा पिंड काँचा फुरे मंत्र ईश्वर वाचा
विधि
जो साधक इस मंत्र का नित्य जाप करता है उसके रूके हुए सभी कार्य मां काली कृपा से सिद्ध होते हैं तथा जो साधक पानी वाला नारियल को काले कपड़े में लपेटकर मां काली के मंदिर में इस मंत्र को जप दिव्य अर्पण करता है उसे कुछ ही दिनों में रोजगार प्राप्त हो जाता है जो साधक ग्रहण रात्रि या दीपावली रात्रि को इस मंत्र को विधि विधान संहिता है उसे मनवांछित फल मिलता है ।।

52…बाधा नाशक मां कालिका का मंत्र
ओम नमो आदेश गुरु को कल कल कालिका देवी करें जिहां पठोवा , तीहॉ जावे छाती बैठे कलेजा खावे रक्त के कुलकुला करवे बैरी की अवरदा ला , खंडित कर के आवे, जब पार्वती के पूजा पावे, जब पार्वती के सच्चा कालिका देवी कहावे
विधि
इस मंत्र को 7 दिन में 11000 जाप विधि विधान सहित करके सिद्ध करें फिर आवश्यकता के समय इस मंत्र को 21 बार अभिमंत्रित करके जल के छीटे रोगी को मार दें तो रोगी के सभी भूत-प्रेत आदि बाधाओं से मुक्ति पाकर स्वस्थ हो जाता है ।।

53…आज एक रक्षा मन्त्र लिख रहा हूँ जो की गुरु ग्रंथ साहिब में लिखित है और सटीक है कैसा भी भय हो, बच्चे को या फिर जवान, बूढ़े को ,नींद में बुरे स्वप्न या फिर किसी की बुरी नज़र सब से बचाव होता है दिन में दो बार सुबह और शाम पढ़ें 11 बार।। मन्त्र। ” 1ओंकार सतगुरु प्रसाद,” “पातसाही 10 वीं “,अकाल पुरख की रक्षा हमने,सरब लोह दी रछिया हमने,सरब काल जी दी रछिया हमने,सरब लोह जी दी रछिया हमने।।। ” बिलावल महल्ला 5 ” ,,,,,,ताती वाव न लागी पार ब्रह्म शरणाई, चहूगिर्द हमारे रामकार दुःख लगे न भाई,सतगुरु पूरा पेटिया जिन बनत बनाई,राम नाम अऊखद दिया एकै लिव लाई,रहाओ, राख लिए तिन राखनहरै सब बिआधि मिटाई, कहै नानक किरपा भई प्रभ भये सहाई,” भैरव महला 5 “उठत सुखिया बैठत सुखिया भऊ न लागै जे ऐसा बुझिया राखा एक हमारा स्वामी सगल घटा को अंतरजामी, रहाओ,सोय अचिंता ,जाग अचिंता जहां कहाँ प्रभ तू वर्तन्ता घर सुख पाया बाहर सुख पाया कहै नानक गुरुमंत्र दिडाया।। जल का लोटा पास रखें और जल घर बार कारोबार में छिड़कें रोगी को दें ,सब तरह के क्लेशों से मुक्ति पाएं , सतगुरु देव भगवान की जय।।

54…श्री हनुमान रक्षा शाबर कवच

हनुमान जी के कुछ सिद्ध मन्त्रों के प्रयोगहनुमान जी की किसी भी मंत्रजप से पहले निचे दिए कवच को सिद्ध करले |
उनके किसी भी मंत्रजप से पूर्व स्वयं की रक्षा के लिए इस कवच को पड़कर अपने छाती पर फूक मारें फिर आप उनके किसी भी मंत्र का अनुष्ठान कर सकते है ।

हनुमान जी के किसी भी मंत्र की साधना के पहले हनुमान जी को चोला चढ़ाएं । रक्षा के लिए गुरु से प्राप्त किसी भी हनुमन्मंत्र का उपयोग कर सकते हैं।

रक्षा-कारक शाबर मन्त्र {कवच }:-

“श्रीरामचन्द्र-दूत हनुमान !
तेरी चोकी – लोहे का खीला, भूत का मारूँ पूत ।
डाकिन का करु दाण्डीया । हम हनुमान साध्या ।
मुडदां बाँधु । मसाण बाँधु । बाँधु नगर की नाई ।
भूत बाँधु ।पलित बाँधु । उघ मतवा ताव से तप ।
घाट पन्थ की रक्षा – राजा रामचन्द्र जी करे ।
बावन वीर, चोसठ जोगणी बाँधु ।
हमारा बाँधा पाछा फिरे, तो वीर की आज्ञा फिरे ।
नूरी चमार की कुण्ड मां पड़े । तू ही पीछा फिरे, तो माता अञ्जनी का दूध पीयाहराम करे ।स्फुरो मन्त्र,ईश्वरी वाचा ।”

विधिः- उक्त मन्त्र का प्रयोग कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही करें । प्रयोग हनुमान् जी के मन्दिर में करें । पहले धूप-दीप-अगरबत्ती-फल-फूल इत्यादि से पूजन करें । सिन्दूर लगाएँ, भोग हेतु गेहूँ के आटे का एक बड़ा रोट बनाये । उसमें गुड़ व घृत मिलाए । साथ ही इलायची-जायफल-बादाम-पिस्ते इत्यादि भी डाले तथा इसका भोग लगाए ।

भोग लगाने के बाद मन्दिर में ही हनुमान् जी के समक्ष बैठकर उक्त मन्त्र का १२५ बार जप करें । जप के अन्त में हनुमान् जी के पैर के नीचे जो तेल मिश्रित सिंदूर होता है, उसे साधक अँगुली से लेकर स्वयं अपने मस्तक पर लगाए । इसके बाद फिर किसी दूसरे दिन मंगलवार या शनिवार को उसी समय उपरोक्तानुसार पूजा कर, काले डोरे में २१ मन्त्र पढ़े और पढ़कर गाँठ लगाए , इसी प्रकार 21 गांठ लगाये तथा डोरे को गले में धारण करे ।

मांस-मदिरा का सेवन न करे । इससे सभी प्रकार के वाद-विवाद में जीत होती है । मनोवाञ्छित कार्य पूरे होते हैं तथा शरीर की सुरक्षा होती है ।

इसी प्रकार गण्डा मंगलवार को बनाकर छोटे बच्चों और बड़ों को भी नजर, तंत्र मंत्र, टोटके आदि से सुरक्षा हेतु पहनाया जा सकता है।

वैसे इसी चतुर्दशी को देवी पूजन कर उपरोक्त पूजन कर नवरात्री के प्रथम या द्वितीय मंगलवार को उपरोक्त गण्डा बनाकर धारण करें तो अति उत्तम होगा।

55……*श्री शरभेश्वर-शालुव -पक्षिराज चिंतामणि शाबर-मंत्र*

ॐ सत नमो आदेश गुरुजी को आदेश आदेश
चेला सुने गुरु फ़रमाय
सिंह दहाड़े घर में जंगल में ना जाये ,
घर को फोरे , घर को तोरे , घर में नर को खाय
जिसने पाला उसी का जीजा साले से घबराय।
आधा हिरना आधा घोडा गऊ का रूप बनाय
एकानन में दुई चुग्गा , सो पक्षी रूप हो जाय।
चार टांग नीचे देखूं , चार तो गगन सुहाय।
फूंक मार जल-भूंज जाय ,काली-दुर्गा खाय।
जंघा पे बैठा यमराज महाबली , मार के हार बनाय।
भों भों बैठे भैरू बाबा , नाग गले लिपटाय।
एक झपट्टा मार के पक्षी , सिंह को ले उड़ जाय।
देख देख जंगल के राजा पक्षी से घबराय।
ॐ खें खां खं फट प्राण ले लो प्राण ले लो घर के लोग चिल्लाय।
ॐ शरभ -शालुव -पक्षिराजाय नम:।
मेरी भक्ति , गुरु की शक्ति , फुरो मंत्र ईश्वरॊवाचा दुहाई महारुद्र की।
देख चेला पक्षी का तमाशा ॐ खें खां खं हुम् फट् स्वाहा ।
श्री नाथजी गुरुजी को आदेश आदेश आदेश

*नोट- जो गुरु से दीक्षित हों सिर्फ वही विधान करें अन्यथा बिना गुरु के पूर्ण विनाश निश्चित है।*

56…मंत्र के स्मरण मात्र से डर भाग जाता है

1. इस मंत्र के स्मरण मात्र से डर भाग जाता है, और अकस्मात् आयी बाधाओ का निवारण होता है । जब भी किसी प्रकार के कोई पशुजन्य या दूसरे तरह से प्राणहानि आशंका हो तब इस मंत्र का ७ बार जाप करना चाहिए । इस प्रयोग के लिए मात्र मंत्र याद होना ज़रुरी है । मंत्र कंठस्थ करने के बाद केवल ७ बार शुद्ध जाप करें व चमत्कार देंखे ।
2. अगर इस मंत्र का एक हज़ार बार बिना रुके लगातार जाप कर लिया जाए तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति विश्व के उच्चतम स्तर तक हो जाती है तथा वह व्यक्ति परम मेधावी बन जाता है ।
3. अगर इस मंत्र का बिना रुके लगातार १०,००० बार जप कर लिया जाए तो उसे त्रिकाल दृष्टि (भूत, वर्त्तमान, भविष्य का ज्ञान) की प्राप्ति हो जाती है ।
4. अगर इस मंत्र का बिना रुके लगातार एक लाख बार, रुद्राक्ष की माला के साथ, लाल वस्त्र धारण करके तथा लाल आसान पर बैठकर, उत्तर दिशा की और मुख करके शुद्ध जाप कर लिया जाये, तो उस व्यक्ति को “खेचरत्व” एवं “भूचरत्व” की प्राप्ति हो जायेगी ।

मंत्र इस प्रकार है -
”ॐ हं ठ ठ ठ सैं चां ठं ठ ठ ठ ह्र: ह्रौं ह्रौं ह्रैं क्षैं क्षों क्षैं क्षं ह्रौं ह्रौं क्षैं ह्रीं स्मां ध्मां स्त्रीं सर्वेश्वरी हुं फट् स्वाहा” ।

57……“ओम नमो बैताल। पीलिया को मिटावे, काटे झारे। रहै न नेंक। रहै कहूं तो डारुं छेद-छेद काटे। आन गुरु गोरख-नाथ। हन हन, हन हन, पच पच, फट् स्वाहा।”
विधिः- उक्त मन्त्र को ‘सूर्य-ग्रहण’ के समय १०८ बार जप कर सिद्ध करें। फिर शुक्र या शनिवार को काँसे की कटोरी में एक छटाँक तिल का तेल भरकर, उस कटोरी को रोगी के सिर पर रखें और कुएँ की ‘दूब’ से तेल को मन्त्र पढ़ते हुए तब तक चलाते रहें, जब तक तेल पीला न पड़ जाए। ऐसा २ या ३ बार करने से पीलिया रोग सदा के लिए चला जाता है।

58…बाघ नख प्रयोग

ईश्वर के द्वारा बनाई कोई भी वस्तु व्यर्थ नही है , उनके द्वारा रचित सृष्टि में जो जहरीले पौधे हैं वे भी तंत्र में उपयोगी हैं ! तंत्र में ही नहीं वनस्पति आम जीवन में भी बहुत उपयोगी है ,इसी प्रकार ईश्वर द्वारा रचित पशु पक्षी और जीव जन्तुओ का प्रत्येक अंग के उपयोगों का कई तंत्र ग्रंथों में उल्लेख मिलता है ! कई विद्वानों ने इस पर शोध कर पशु पक्षिओ पर किताबे लिखी हैं ! यहाँ तक कि भगवान् विष्णु ने वाराह अवतार लिया इसलिए शूकर दन्त का उपयोग वराह दन्त के रूप में किया जाता है !

इसी प्रकार उल्लू को माँ लक्ष्मी की सवारी माना जाता है और उनके भी प्रत्येक अंग का उपयोग तंत्र में किया जाता है ! उल्लू तंत्र और कौवा तंत्र पर तो इतने ग्रन्थ लिखे गये हैं कि एक जन्म अधूरा पढ़ जाए इन रहस्यमय पक्षिओ को जानने के लिए ! इसी प्रकार बाघ के नाखून का भी तंत्र में बहुत अधिक उपयोग किया जाता है ! बाघ के नाखून को यदि सिद्ध कर गले में धारण कर लिया जाए तो शत्रु मूक होकर व्यक्ति को देखते रह जाते हैं और यदि बाघ के बालो और खाल को विशेष मन्त्रों द्वारा अभिमंत्रित कर यंत्रों के साथ गले में धारण कर लिया जाए तो तुरंत कार्य सिद्धि होती है !

मुकद्दमे में जीतने के लिए और शत्रु पक्ष के स्तम्भन के लिए भी बाघ का नख गले में धारण किया जाता है ! बाघ नख के अनेको विचित्र प्रयोग हैं इस बाघ नख के उपयोग द्वारा भगवान् नरसिंह का आवाहन कर शत्रु का वध भी किया जा सकता हैं और इसी एक बाघ नख द्वारा घर अथवा ग्राम की सीमा को बाँधा भी जा सकता है ! इस प्रकार बंधन करने से स्वयं भगवान् नरसिंह उस स्थान की रक्षा करते हैं और साधक को निर्भयता प्रदान करते हैं !

|| मंत्र ||

नरसिंह वीर महाबलवीर मारे वैरी पकड़ के सिर
मेरा भेजा जाये वैरी दुश्मन का कलेजा खाये
मेरा भेजा ना जाये तो माता कालका की सेज पर लत्त खाके गिर जाएँ
चलेगा मंत्र फुरेगा वाचा आओ नरसिंह वीर देखा तेरे इल्म का तमाशा
मेरे गुरु का शब्द सांचा !
दुहाई गुरु गोरखनाथ की !

|| विधि ||

इस मंत्र को 21 दिन प्रतिदिन 1100 बार जपे , ऐसा करने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा , प्रतिदिन भगवान् नरसिंह को पुए ( गुलगुले ) का भोग लगायें और धुप दीप जला कर इस मंत्र का जप करें !

|| प्रयोग विधि ||

बाघ नख पर इस मंत्र का पूर्ण विधि विधान से प्रतिदिन 1100 बार 11 दिन जप करें , इससे बाघ नख सिद्ध हो जाएगा और इसे गले में धारण करने से आपका प्रत्येक कार्य सिद्ध हो जाएगा !

चेतावनी – शेर अथवा बाघ संरक्षित पशुओं की श्रेणी में आते हैं ! इस विधि का उल्लेख करना मात्र परम्परागत ज्ञान को आगे बढ़ाना है !

59…इच्छित कार्य पूर्ति

बहोत बार येसा होता है,हम कुछ और चाहते है और होता कुछ अलग ही है,इस कारण से मन व्यथित हो जाता है,फिर क्या हम हमारे तकदीर को कोसने लगते है,इस साधना से आपके सभी इच्छित कार्य पूर्ण होते है,ज्यो आप चाहते हो वही होता है॰

मंत्र –

ॐ कामरू कामाक्षा देवी , जहा बसे लक्ष्मी महारानी । आवे , घर मे जमकर बैठे । सिद्ध होय , मेरा काज सुधारे । जो चाहु , सो होय । ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं फट ॥

पीपल के पत्ते पे अष्टगंध लगाये,और अष्टगंध को केवड़े के तेल या इत्र मे गीला करके ही लगाये,यह क्रिया शनिवार को रात्री मे करे,नित्य 11 माला जाप 7 दिन तक करे,हर प्रकार का इच्छा पूरा होता है,जैसे नौकरी,परीक्षा के नतीजे,शादी,प्रमोशन,संतान प्राप्ति…….

60…इन मंत्रों से प्रसन्न होते है हनुमान जी

ज्ञानियों में परम ज्ञानी, दुष्टों के लिए कठोर तथा भक्तों के लिए परम दयालु राम के प्रिय भक्त हनुमानजी, देवों के सेनापति मंगल के स्वामी हैं। मंगल को प्रसन्न करने के लिए मंगल के स्वामी रुद्रावतार श्री हनुमानजी की आराधना परम फलदायी है। कहा गया है कि जब स्वामी प्रसन्न हों तो सेवक स्वत: ही प्रसन्न हो जाता है अर्थात् श्री हनुमानजी को प्रसन्न करने से सर्वसुख प्राप्त हो जाता है। साधक निम्नलिखित विधि से मंत्रों का उच्चारण करते हुए ध्यान, पूजन एवं जपादि कम करें। ध्यान रहे- हनुमत् पूजन में लाल रंग प्रधान होता है जैसे लाल वस्त्र, लाल पुष्प, सिंदूर आदि। श्री हनुमानजी को सिंदूर अवश्य चढ़ाएं।

विनियोग

ॐ अस्य श्री हनुमत्कवचोस्तोत्र
मंत्रस्य श्री रामचन्द्र ऋषि:,
अनुष्टुपछन्द:, श्री महावीरो हनुमान
देवता, मरुतात्मज इति बीजम्,
ॐ अन्जनी सुनुरिति शाक्ति:,
ॐ ह्रैं ह्रां ह्रौं कवचम्
ॐ फट् स्वाहा कीलकम्,
लक्ष्‍मण प्राणदाता बीजम्,
सकलकार्य सिद्धयर्थे जपे विनियोग:।
मंत्र- ॐ ऐं श्रीं ह्रां ह्रों ह्रूं ह्रैं ह्रं

करन्यास
अब निम्नलिखित विधि से करन्यास करें:-

ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नम:।
-अपने अंगूठों को नमस्कार करें।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नम:।
-अपनी तर्जनी उंगलियों को नमस्कार करें।
ॐ ह्रं मध्यमाभ्यां नम:।
-मध्‍यमा उंगलियों को नमस्कार करें।
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नम:।
-अनामिका उंगलियों को नमस्कार।
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नम:।
-छोटी उंगलियों को नमस्कार।
ॐ ह्रं करतलकर पृष्ठाभ्यां नम:।
- हथेलियों के पृष्ठ भाग को परस्पर मिलाकर नमस्कार करें।

हृदयादिन्यास

ॐ अंजनीसूतवे हृदयाय नम:।

-हृदय स्पर्श करें।

-ॐ रूद्र मूर्तये शिरसे स्वाहा।

-दाएं हाथ की उंगलियों से सिर का स्पर्श करें।

ॐ वायुसुतात्मने
शिखायै वषट्‍।

-शिखा (चोटी) को स्पर्श करें।

ॐ वज्रदेहाय कवचम् हुं।

-दोनों भुजाओं का स्पर्श करें।

ॐ रामदूताय नेत्रत्रयाय वौषट्‍।

-दोनों नेत्रों के बीच स्पर्श करें (तीसरे नेत्र को)

ॐ ब्रह्मास्त्र निवारणाय अस्त्राय फट् स्वाहा।

-ॐ ब्रह्मास्त्र को लौटा देने वाले कहकर उनका आवाहन करें।

रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि।

-हम श्री रामचन्द्रजी के विद्यामान होने का अनुभव करते हैं और वानरराज हनुमान का ध्यान करते हैं।
तन्नोहनुमान प्रचोदयात् ॐ हुं फट्‍।

-चारों ओर चुटकी बजाते हुए दिशाओं को कवच से रक्षित करें।
ध्‍यान

हृदयादिन्यास करने के बाद निम्न मंत्र का पाठ करते हुए श्री हनुमानजी का ध्‍यान करें।
‘वज्रांग पिंगकेशं कनक मलयसत्कुण्डलाकांतगंडं। नाना विद्याधिनार्थ करतल विधृतं पूर्ण कुंभं दृढ़ं च। भक्ता भीष्टाधिकारं विदधति त्रैलोक्य त्राणकारं सकल भुवगं रामदूतं नमामि।’

अर्थ- वज्र के समान शरीर, पीले सुनहरे बाल, स्वर्णमयकुण्डलों से शोभायमान, अनेक विद्याओं के ज्ञाता, भरे हुए जल-कलश को धारण करने वाले, तीनों लोकों की रक्षा करने वाले, सर्वव्यापक श्री रामदूत (हनुमानजी) को नमस्कार करता हूं।

उपरोक्त विधि से श्री हनुमानजी का ध्‍यान करें। पीड़ाहारी श्री हनुमान जी समस्त विघ्न बाधाओं का शमन करते हैं।

साधकजन प्रात:काल स्नानादि के पश्चात श्री हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, बजरंग वाण आदि का पाठ अवश्य करें। यह क्रिया प्रतिदिन संपन्न करें तो अति उत्तम है।

हनुमानजी के मंदिर पर जाकर पूजा-पाठ करके हनुमान चालीसा बांटें।

61…किसी भी अघात से पीड़ित हैं तो करें राक्षसराज विभीषण का यह प्रयोग, 41 दिन में होगा चमत्‍कार

रावण के भाई श्री विभीषण जो की भगवान राम व हनुमान जी के अनन्य भक्त थे, अपनी पूजा में वो निरंतर दोनों की पूजा किया करते थे। भक्त विभीषण ने कष्टों से मुक्ति व सुरक्षा हेतु उन्होंने ‘हनुमद वडवानल स्तोत्र’ की रचना करी।

इस चमत्कारी वडवानल स्तोत्र पर भगवान श्रीराम व हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त तो है ही साथ में विभीषण का तप बल भी इस स्तोत्र के साथ है। अत: इस शक्तिशाली स्तोत्र के पाठ से न सिर्फ व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता है अपितु उसकी अभीष्ठ इच्छा की भी पूर्ति होती है।

यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, दूसरों के द्वारा किए गए पीड़ा कारक कार्यों से बचाव, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है।

विधि:- सरसों के तेल का दीपक जलाकर 108 पाठ नित्य 41 दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है।

विनियोग:-

ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषि:, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे सकल- राज- कुल- संमोहनार्थे, मम समस्त- रोग प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त- पाप-क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये ।

ध्यान:-

मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं ।

वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ।।

वडवानल स्तोत्र :-

ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम सकल- दिङ्मण्डल- यशोवितान- धवलीकृत- जगत-त्रितय वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र उदधि-बंधन दशशिर: कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार- ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व- पाप- ग्रह- वारण- सर्व- ज्वरोच्चाटन डाकिनी- शाकिनी- विध्वंसन ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दु:ख निवारणाय ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर, माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा ।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्र: आं हां हां हां हां ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा ।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु शिर:-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय नागपाशानन्त- वासुकि- तक्षक- कर्कोटकालियान् यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा ।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा ।

उपरोक्त हनुमद वडवानल स्तोत्र का निरंतर एक से ग्यारह पाठ करने से सभी समस्याओ का हल निश्चित मिलता है।

62…हनुमान जी की किसी भी मंत्र जाप से पहले निचे दिए कवच को सिद्ध कर ले ! उनके किसी भी मंत्र जाप से पूर्व स्वयं की रक्षा के लिए इस कवच को पड़कर अपने छाती पर फूक मरे ! फिर आप उनके किसी भी मंत्र का अनुष्ठान कर सकते है ! हनुमान लाला के किसी भी मंत्र की साधना के पहले हनुमान जी को चोला चड़वाए !
आसान लाल
ब्रम्हचर्य का पालन करे
मासाहार न करे
माला मूंगे की रुद्राक्ष की या चन्दन की प्रयोग में ले
साधना के पूर्ण होते ही नारियल फूल प्रसाद भेट चढ़ाये

रक्षा-विधानः रक्षा-कारक शाबर मन्त्र
“श्रीरामचन्द्र-दूत हनुमान ! तेरी चोकी – लोहे का खीला, भूत का मारूँ पूत । डाकिन का करु दाण्डीया । हम हनुमान साध्या । मुडदां बाँधु । मसाण बाँधु । बाँधु नगर की नाई । भूत बाँधु । पलित बाँधु । उघ मतवा ताव से तप । घाट पन्थ की रक्षा – राजा रामचन्द्र जी करे ।
बावन वीर, चोसठ जोगणी बाँधु । हमारा बाँधा पाछा फिरे, तो वीर की आज्ञा फिरे । नूरी चमार की कुण्ड मां पड़े । तू ही पीछा फिरे, तो माता अञ्जनी का दूध पीया हराम करे । स्फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।”

विधिः- उक्त मन्त्र का प्रयोग कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही करें । प्रयोग हनुमान् जी के मन्दिर में करें । पहले धूप-दीप-अगरबत्ती-फल-फूल इत्यादि से पूजन करें । सिन्दूर लगाएँ, फिर गेहूँ के आटे का एक बड़ा रोट बनाए । उसमें गुड़ व घृत मिलाए । साथ ही इलायची-जायफल-बादाम-पिस्ते इत्यादि भी डाले तथा इसका भोग लगाए । भोग लगाने के बाद मन्दिर में ही हनुमान् जी के समक्ष बैठकर उक्त मन्त्र का १२५ बार जप करें । जप के अन्त में हनुमान् जी के पैर के नीचे जो तेल होता है, उसे साधक अँगुली से लेकर स्वयं अपने मस्तक पर लगाए । इसके बाद फिर किसी दूसरे दिन उसी समय उपरोक्तानुसार पूजा कर, काले डोरे में २१ मन्त्र और पढ़कर गाँठ लगाए तथा डोरे को गले में धारण करे । मांस-मदिरा का सेवन न करे । इससे सभी प्रकार के वाद-विवाद में जीत होती है । मनोवाञ्छित कार्य पूरे होते हैं तथा शरीर की सुरक्षा होती है ।

हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग

।। श्री पार्वत्युवाच ।।

हनुमच्छावरं मन्त्रं, नित्य-नाथोदितं तथा ।
वद मे करुणा-सिन्धो ! सर्व-कर्म-फल-प्रदम् ।।

।। श्रीईश्वर उवाच ।।

आञ्जनेयाख्यं मन्त्रं च, ह्यादि-नाथोदितं तथा ।
सर्व-प्रयोग-सिद्धिं च, तथाप्यत्यन्त-पावनम् ।।

।। मन्त्र ।।

“ॐ ह्रीं यं ह्रीं राम-दूताय, रिपु-पुरी-दाहनाय अक्ष-कुक्षि-विदारणाय, अपरिमित-बल-पराक्रमाय, रावण-गिरि-वज्रायुधाय ह्रीं स्वाहा ।।”

विधिः- ‘आञ्जनेय’ नामक उक्त मन्त्र का प्रयोग गुरुवार के दिन प्रारम्भ करना चाहिए। श्री हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख बैठकर दस सहस्त्र जप करे। इस प्रयोग से सभी कामनाएँ पूर्ण होती है। मनोनुकूल विवाह-सम्बन्ध होता है। अभिमन्त्रित काजल रविवार के दिन लगाना चाहिए। अभिमन्त्रित जल नित्य पीने से सभी रोगों से मुक्त होकर सौ वर्ष तक जीवित रहता है। इसी प्रकार आकर्षण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण आदि सभी प्रयोग उक्त मन्त्र से किए जा सकते हैं।
।। मन्त्र ।।

“ॐ नमो भगवते हनुमते, जगत्प्राण-नन्दनाय, ज्वलित-पिंगल-लोचनाय, सर्वाकर्षण-कारणाय ! आकर्षय आकर्षय, आनय आनय, अमुकं दर्शय दर्शय, राम-दूताय आनय आनय, राम आज्ञापयति स्वाहा।”

विधिः- उक्त ‘केरल′- मन्त्र का जप रविवार की रात्रि से प्रारम्भ करे। प्रतिदिन दो हजार जप करे। बारह दिनों तक जप करने पर मन्त्र सिद्धि होती है। उसके बाद पाँच बालकों की पूजा कर उन्हें भोजनादि से सन्तुष्ट करना चाहिए। ऐसा कर चुकने पर साधक को रात्रि में श्री हनुमान जी स्वप्न में दर्शन देंगे और अभीष्ट कामना को पूर्ण करेंगे। इस मन्त्र से ‘आकर्षण’ भी होता है। यथा-

।। मन्त्र ।।

“ॐ यं ह्रीं वायु-पुत्राय ! एहि एहि, आगच्छ आगच्छ, आवेशय आवेशय, रामचन्द्र आज्ञापयति स्वाहा ।”

विधिः- ‘कर्णाटक’ नामक उक्त मन्त्र को, पूर्ववत् पुरश्चरण कर, सिद्ध कर लेना चाहिए। फिर यथोक्त-विधि से ‘आकर्षण’ प्रयोग करे। यथा-

।। मन्त्र ।।

ॐ नमो भगवते ! असहाय-सूर ! सूर्य-मण्डल-कवलीकृत ! काल-कालान्तक ! एहि एहि, आवेशय आवेशय, वीर-राघव आज्ञापयति स्वाहा।”
विधिः- उक्त ‘आन्ध्र’ मन्त्र के पुरश्चरण की भी वही विधि है। सिद्ध-मन्त्र द्वारा सौ बार अभिमन्त्रित भस्म को शरीर में लगाने से सर्वत्र विजय मिलती है।

।। मन्त्र ।।

“ॐ नमो भगवते अञ्जन-पुत्राय, उज्जयिनी-निवासिने, गुरुतर-पराक्रमाय, श्रीराम-दूताय लंकापुरी-दहनाय, यक्ष-राक्षस-संहार-कारिणे हुं फट्।”

विधिः- उक्त ‘गुर्जर’ मन्त्र का दस हजार जप रात्रि में भगवती दुर्गा के मन्दिर में करना चाहिए। तदन्तर केवल एक हजार जप से कार्य-सिद्धि होगी। इस मन्त्र से अभिमन्त्रित तिल का लड्डू खाने से और भस्म द्वारा मार्जन करने से भविष्य-कथन करने की शक्ति मिलती है। तीन दिनों तक अभिमन्त्रित शर्करा को जल में पीने से श्रीहनुमानजी स्वप्न में आकर सभी बातें बताते हैं, इसमें सन्देह नहीं यथा-

संकट से रक्षा के लिए कुछ विशिष्ट प्रयोग

१. भयंकर,आपति आने पर हनुमान जी का ध्यान करके रूद्राक्ष माला पर १०८ बार जप करने से कुछ ही दिनों में सब कुछ सामान्य हो जाता है।
मंत्र:-त्वमस्मिन् कार्य निर्वाहे प्रमाणं हरि सतम।
तस्य चिन्तयतो यत्नों दुःख क्षय करो भवेत्॥
२. शत्रु,रोग हो या दरिद्रता,बंधन हो या भय निम्न मंत्र का जप बेजोड़ है,इनसे छुटकारा दिलाने में यह प्रयोग अनूभुत है।नित्य पाँच लौंग,सिनदुर,तुलसी पत्र के साथ अर्पण कर सामान्य मे एक माला,विशेष में पाँच या ग्यारह माला का जप करें।कार्य पूर्ण होने पर १०८बार,गूगूल,तिल धूप,गुड़ का हवन कर लें।आपद काल में मानसिक जप से भी संकट का निवारण होता है।
मंत्र:-मर्कटेश महोत्साह सर्व शोक विनाशनं,शत्रु संहार माम रक्ष श्रियम दापय में प्रभो॥
३. अनेकानेक रोग से भी लोग परेशान रहते है,इस कारण श्री हनुमान जी का तीव्र रोग हर मंत्र का जप करनें,जल,दवा अभिमंत्रित कर पीने से असाध्य रोग भी दूर होता है। तांबा के पात्र में जल भरकर सामने रख श्री हनुमान जी का ध्यान कर मंत्र जप कर जलपान करने से शीघ्र रोग दूर होता है।श्री हनुमान जी का सप्तमुखी ध्यान कर मंत्र जप करें।
मंत्र:-ॐ नमो भगवते सप्त वदनाय षष्ट गोमुखाय,सूर्य रुपाय सर्व रोग हराय मुक्तिदात्रे

“को नहीं जानत जग में कपि सकंट मोचन नाम तिहारो ….”
कलियुग की शुरुआत होते ही सारे देवता इस भू लोक को छोड़ कर चले गए थे सिर्फ भैरव और हनुमान ही ऐसे देवता है जिन्होंने कलयुग में भू लोक पर निवास किआ ! इसलिए हनुमान लाला और भैरव महाराज दोनों की उपासना कलयुग में उत्तम फल प्रदान करती है
जब भी ऐसी कोई समस्या हो आप किसी भी पात्र में जल ले ले और निम्न मंत्र से उसे अभिमंत्रित कर ले मतलब इसके दो तरीके हैं एक तो मंत्र जप करते समय अपने सीधे हाथ की एक अंगुली इस जल से स्पर्श कराये रखे या जितना आप को मंत्र जप करना हैं उतना कर ले और फिर पूरे श्रद्धा विस्वास से इस जल में एक फूंक मार दे ..
यह मन में भावना रखते हुए की इस मंत्र की परम शक्ति अब जल में निहित हैं .. और यह सब मानने की बात नहीं हैं अनेको वैज्ञानिक परीक्षणों से यह सिद्ध भी हुआ हैं की निश्चय ही कुछ तो परिवर्तन उच्च उर्जा का जल में समावेश होता ही हैं .
मंत्र :
ॐ नमो हनुमते पवन पुत्राय ,वैश्वानर मुखाय पाप दृष्टी ,घोर दृष्टी , हनुमदाज्ञा स्फुरेत स्वाहा ||

कम से कम १०८ बार मंत्र जप तो करे ही और इस अभिमंत्रित जल को जो भी पीड़ित हैं उ स पर छिडके .. उसे भगवान् हुनमान की कृपा से निश्चय ही लाभ होना शुरू हो जायेगा और जो भी इसे रोज करना चाहे उनके जीवन कि अनेको कठिनाई तो स्वत ही दूर होती जाएगी .. तो आवश्यक सावधानी जो की हनुमान साधना में होती हैं वह करते हुए कर सकते हैं ..

हनुमान जी के संकट-नाशक अनुष्ठान

१॰ विनियोगः- ॐ अस्य श्री हनुमन्महामन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः, गायत्री छन्दः, हनुमान देवता, हं बीजं, नमः शक्तिः, आञ्जनेयाय कीलकम् मम सर्व-प्रतिबन्धक-निवृत्ति-पूर्वकं हनुमत्प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।
ऋष्यादिन्यासः- ईश्वर ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, हनुमान देवतायै नमः हृदि, हं बीजाय नमः नाभौ, नमः शक्तये नमः गुह्ये, आञ्जनेयाय कीलकाय नमः पादयो मम सर्व-प्रतिबन्धक-निवृत्ति-पूर्वकं हनुमत्प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।
करन्यासः- ॐ ह्रां आञ्जनेयाय अंगुष्ठाभ्यां नमः, ॐ ह्रीं महाबलाय तर्जनीभ्यां नमः, ॐ ह्रूं शरणागत-रक्षकाय मध्यमाभ्यां नमः, ॐ ह्रैं श्री-राम-दूताय अनामिकाभ्यां नमः, ॐ ह्रौं हरिमर्कटाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः, ॐ ह्रः सीता-शोक-विनाशकाय करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः ।
हृदयादिन्यासः- ॐ ह्रां आञ्जनेयाय हृदयाय नमः, ॐ ह्रीं महाबलाय शिरसे स्वाहा, ॐ ह्रूं शरणागत-रक्षकाय शिखायै वषट्, ॐ ह्रैं श्री-राम-दूताय कवचाय हुम्, ॐ ह्रौं हरिमर्कटाय नेत्र-त्रयाय वोषट्, ॐ ह्रः सीता-शोक-विनाशकाय अस्त्राय फट् ।
ध्यानः-
ॐ उद्यद्बालदिवाकरद्युतितनु पीताम्बरालंकृतं ।
देवेन्द्र-प्रमुख-प्रशस्त-यशसं श्रीराम-भूप-प्रियम् ।।
सीता-शोक-विनाशिनं पटुतरं भक्तेष्ट-सिद्धि-प्रदं ।
ध्यायेद्वानर-पुंगवं हरिवरं श्रीमारुति सिद्धिदम् ।।

निम्नलिखित मन्त्रों में से किसी एक मन्त्र का जप ६ मास तक नित्य-प्रति ३००० करना चाहिए -

१॰ “ॐ हं हनुमते आञ्जनेयाय महाबलाय नमः ।”
२॰ “ॐ आञ्जनेयाय महाबलाय हुं फट् ।”

२॰ “ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय महाभीमपराक्रमाय सकलशत्रुसंहारणाय स्वाहा।
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय महाबलप्रचण्डाय सकलब्रह्माण्डनायकाय सकलभूत-प्रेत-पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षिणी-पूतना-महामारी-सकलविघ्ननिवारणाय स्वाहा।
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् (गायत्री)
ॐ नमो हनुमते महाबलप्रचण्डाय महाभीम पराक्रमाय गजक्रान्तदिङ्मण्डलयशोवितानधवलीकृतमहाचलपराक्रमाय पञ्चवदनाय नृसिंहाय वज्रदेहाय ज्वलदग्नितनूरुहाय रुद्रावताराय महाभीमाय, मम मनोरथपरकायसिद्धिं देहि देहि स्वाहा।
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय महाभीमपराक्रमाय सकलसिद्धिदाय वाञ्छितपूरकाय सर्वविघ्ननिवारणाय मनो वाञ्छितफलप्रदाय सर्वजीववशीकराय दारिद्रयविध्वंसनाय परममंगलाय सर्वदुःखनिवारणाय अञ्जनीपुत्राय सकलसम्पत्तिकराय जयप्रदाय ॐ ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रूं फट् स्वाहा।”
विधिः-
सर्वकामना सिद्धि का संकल्प करके उपर्युक्त पूरे मन्त्र का १३ दिनों में ब्राह्मणों द्वारा ३३००० जप पूर्ण कराये। तेरहवें दिन १३ पान के पत्तों पर १३ सुपारी रखकर शुद्ध रोली अथवा पीसी हुई हल्दी रखकर स्वयं १०८ बार उक्त मन्त्र का जाप करके एक पान को उठाकर अलग रख दे। तदन्तर पञ्चोपचार से पूजन करके गाय का घृत, सफेद दूर्वा तथा सफेद कमल का भाग मिलाकर उसके साथ उस पान का अग्नि में हवन कर दे। इसी प्रकार १३ पानों का हवन करे।
तदन्तर ब्राह्मणों द्वारा उक्त मन्त्र से ३२००० आहुतियाँ दिलाकर हवन करायें। तथा ब्राह्मणों को भोजन कराये।

३॰ “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते हनुमते मम कार्येषु ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल असाध्यं साधय साधय मां रक्ष रक्ष सर्वदुष्टेभ्यो हुं फट् स्वाहा।”
विधिः-मंगलवार से प्रारम्भ करके इस मन्त्र का प्रतिदिन १०८ बार जप करता रहे और कम-से-कम सात मंगलवार तक तो अवश्य करे। इससे इसके फलस्वरुप घर का पारस्परिक विग्रह मिटता है, दुष्टों का निवारण होता है और बड़ा कठिन कार्य भी आसानी से सफल हो जाता है।

४॰ “हनुमन् सर्वधर्मज्ञ सर्वकार्यविधायक।
अकस्मादागतोत्पातं नाशयाशु नमोऽस्तु ते।।”
या “हनूमन्नञ्जनीसूनो वायुपुत्र महाबल।
अकस्मादागतोत्पातं नाशयाशु नमोऽस्तु ते।।”
विधिः- प्रतिदिन तीन हजार के हिसाब से ११ दिनों में ३३ हजार जप जो, फिर ३३०० दशांश हवन या जप करके ३३ ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाये। इससे अकस्मात् आयी हुई विपत्ति सहज ही टल जाती है।

हनुमान जी की साधना में ब्रम्हचर्य अनिवार्य है ! भोजन याम नियम की सावधानी बरते ! दशांश हवन करने से हनुमान जी सब कष्टो से मुक्ति देते है ! सारे ही मंत्र विलक्षण है बस नियमित जाप और हवन की आवश्यकता है

पीलिया रोग को झाड़ा मंत्र
५- “ॐ यो यो हनुमन्त फलफलित धग्धगिति आयुराष परुडाह ।”
प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखकर इस मंत्र का २५ माला जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है । इस मंत्र के द्वारा पीलिया रोग को झाड़ा जा सकता है ।

विष निवारण मंत्र
ॐ पश्चिम-मुखाय-गरुडासनाय पंचमुखहनुमते नमः मं मं मं मं मं, सकल विषहराय स्वाहा ।”
इस मन्त्र की जप संख्या १० हजार है, इसकी साधना दीपावली की अर्द्ध-रात्रि पर करनी चाहिए । यह मन्त्र विष निवारण में अत्यधिक सहायक है ।

ग्रह-दोष निवारण मंत्र
“ॐ उत्तरमुखाय आदि वराहाय लं लं लं लं लं सी हं सी हं नील-कण्ठ-मूर्तये लक्ष्मणप्राणदात्रे वीरहनुमते लंकोपदहनाय सकल सम्पत्ति-कराय पुत्र-पौत्रद्यभीष्ट-कराय ॐ नमः स्वाहा ।”
इस मन्त्र का उपयोग महामारी, अमंगल एवं ग्रह-दोष निवारण के लिए है ।

वशीकरण मंत्र
“ॐ नमो पंचवदनाय हनुमते ऊर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय रुं रुं रुं रुं रुं रुद्रमूर्तये सकललोक वशकराय वेदविद्या-स्वरुपिणे ॐ नमः स्वाहा ।”
यह वशीकरण के लिए उपयोगी मन्त्र है ।

भूत-प्रेत दोष निवारण मंत्र
“ॐ श्री महाञ्जनाय पवन-पुत्र-वेशयावेशय ॐ श्रीहनुमते फट् ।”
यह २५ अक्षरों का मन्त्र है इसके ऋषि ब्रह्मा, छन्द गायत्री, देवता हनुमानजी, बीज श्री और शक्ति फट् बताई गई है । छः दीर्घ स्वरों से युक्त बीज से षडङ्गन्यास करने का विधान है । इस मन्त्र का ध्यान इस प्रकार है -
आञ्जनेयं पाटलास्यं स्वर्णाद्रिसमविग्रहम् ।
परिजातद्रुमूलस्थं चिन्तयेत् साधकोत्तम् ।। (नारद पुराण ७५-१०२)
इस प्रकार ध्यान करते हुए साधक को एक लाख जप करना चाहिए । तिल, शक्कर और घी से दशांश हवन करें और श्री हनुमान जी का पूजन करें । यह मंत्र ग्रह-दोष निवारण, भूत-प्रेत दोष निवारण में अत्यधिक उपयोगी है ।

उदररोग नाशक मंत्र

“ॐ यो यो हनुमंत फलफलित धग्धगित आयुराषः परुडाह ।”
उक्त मन्त्र को प्रतिदिन ११ बार पढ़ने से सब तरह के पेट के रोग शांत हो जाते हैं ।

63…ॐ ठः ठः ठः ठः अमुकीं (नाम लें) मे वशमानय स्वाहा ह्रीं क्लीं श्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा । श्री बटुकाय नमः।।

अथ प्रयोग विधि – इस मंत्र को १०००० जप रविवार के दिन जप करने से सिद्ध होता है ।। इसके प्रयोग करने की यह विधि है कि जौ का आटा सवा पाव महीन पीस कर १ एक रोटी बेले और उसे मन्द मन्द आंच पर सैकें दूसरी तरफ न सैकें एक ही तरफ ऎसी सैके कि दोनों तरफ सिक जाये ।। फिर जिधर सैक नही लगाया है उधर उपरोक्त मंत्र तर्जनी (राइट हैंड की फस्ट फिंगर) से सिंदूर से लिखें ।। फिर पंचोपचार पूजा कर मिष्ठान, दही, चीनी उस रोटी के उपर रखना यह सब वस्तु इस प्रकार रखना जिससे रोटी ढक जाये ।।

इस प्रकार करके जिसे वश में करना हो उसका नाम ले लेकर उपरोक्त मंत्र का १०८ एक सौ आठ बार जप करें उसके बाद मंत्र पढ पढ के उस रोटी के टुकडे २ करके काले कुत्ते को खिलायें इस प्रकार करने से स्त्री अवश्य वश मे होती है ।। जो पंचोपचार पूजन सामग्री है । वह मंत्र के पुरश्चरण के बाद दक्षिणा सहित गोरे बटुक नाथ ( आठ या दस साल ) के बालक को दे ।। पंचोपचार सामग्री यह है – गंध, सुपारी, पान, दीपक ।। इति द्वितीय स्त्री वशीकरण मंत्र ।

64…’कामाख्‍या देश कामाख्‍या देवी,
जहां बसे इस्‍माइल जोगी,
इस्‍माइल जोगी ने लगाई फुलवारी,
फूल तोडे लोना चमारी,
जो इस फूल को सूँघे बास,
तिस का मन रहे हमारे पास,
महल छोडे, घर छोडे, आँगन छोडे,
लोक कुटुम्‍ब की लाज छोडे,
दुआई लोना चमारी की,
धनवन्‍तरि की दुहाई फिरै।’
”किसी भी शनिवार से शुरू करके 31 दिनों तक नित्‍य 1144 बार मंत्र का जाप करें तथा लोबान, दीप और शराब रखें, फिर किसी फूल को 50 बार अभिमंत्रित करके स्‍त्री को दे दें। वह उस फूल को सूँघते ही वश में हो जाएगी।”

65…सिद्ध वशीकरण साधना

सूर्य/चन्द्र ग्रहण/होली मे यह साधना शुरू करनी है,५ दिन मे इस साधना मे ५११ माला मंत्र जाप आवश्यक है, सूर्य/चन्द्र ग्रहण/होली मे तो १११ माला जाप से मंत्र सिद्ध होता है,मंत्र जाप के बाद १११ मंत्र से हवन मे लोबान की आहुती दे,इस क्रिया से मंत्र अत्यधिक शक्तिशाली हो जायेगा, सूर्य/चन्द्र ग्रहण/होली के बाद ४ दिन मे भी १०० माला जाप और १०० आहुति देने से आपको मंत्र का पूर्ण सिद्धि मिलेगा॰

साधना विधि

गुरु पूजन कर लीजिये और साथ मे गुरुमंत्र की ४ माला मंत्र जाप भी,काले रंग के आसन पर बैठकर दक्षिण दिशा की और मुख करे,काले वस्त्र धरण कर सकते है,माला काली हकीक/रुद्राक्ष का हो,सामने चमेली के तेल का अखंडित दीपक प्रज्वलित करे और सदगुरुजी से पूर्ण सफलता का प्रार्थना करते हुये मंत्र जाप प्रारंभ कर दे॰

मंत्र

॥ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिक “सर्वान”मम वश्यं कुरु-कुरु सर्वान कामान मे साधय स्वाहा ॥

जिस स्त्री पुरुष को आप वश करना चाहते है उसका नाम प्रयोग करते समय सर्वान के स्थान पर बोलकर जाप करना है।

66…साबर वशीकरण मंत्र-

॥ मै तोह मोहो मोहिनी,तू मोहे संसार । बाट के बटोहिया मोहे,कुंआ की पनिहारी मोहे,पलना बैठी रानी मोहे। दुलीचा बैठो राजा मोहे,ठग मोहे,ठाकुर मोहे,पर-घर मोहे। सब जात मोहले “अमुक”को मोहाईले । मेरे पाईन तर आन राख । उलटन्त वेद ,पलटन्त कट काया ,तोहि श्रीनरसिंह बुलाया । मेरी भगत ,गुरु की सकत,फुरै मंत्र ईश्वरो वाचा ॥

साधना विधि-

व्यक्ति विशेष पर प्रयोग करने से पूर्व मंत्र का किसी भी शुभ समय मे ११ दिन से पहिले या ११ डीनो मे १,१०० बार मंत्र जाप करले,मंत्र जाप के बाद जलते हुये कोयलों पे मंत्र से लोबान+गूगल मिलकर १०८ आहुती दे दीजिये,इस सारे क्रिया के बाद अमुक के जगह स्त्री/पुरुष का नाम लेकर नित्य १०८ बार जाप कुछ ही दिन करने से व्यक्ति विशेष आपके अनुकूल हो जायेगा,साधमा पूर्णत: प्रामाणिक है ॥

विशेषः- इस प्रकार के मन्त्र उग्र प्रकृति के होते है। स्व-रक्षा व गुरु निर्देशन के अभाव में प्रयुक्त करना हानिकारक है तथा सामाजिक व नैतिक दृष्टि से अनुचित भी। यहाँ पर मात्र प्राचीन विद्या के संरक्षण हेतु प्रस्तुत किये ।

 

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