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!!जै श्री महाकाल !!
!! भुतडामर तन्त्र !!
यह ग्रंथ श्री उन्मत भैरव एवं उन्मत भैरवी के संवाद के रुप मे आरंभ होता है!!
जिसमे यक्ष,मनुष्य,भुजंग,किन्न्र,प्रथम,नापिकादि के सिद्धि लाभ तथा रक्षा के प्रकरण मिलते है!!इसमे सभि देवताओं एवं भुतादिगणों के मारण का उल्लेख है!सुन्दरि साधना,पिशाचिनि चेटिका साधन, अष्टकात्यानी साधना,प्रथमाधिपक्रोधराज साधना,कैकरी साधना,चेटिका साधना,भूतनि साधना, अपसरा साधना,यक्षिंणी साधना,अष्टनागिनी साधना,किन्न्र साधना,योगिनी साधना, इत्यादि का उल्लेख है!!यह तन्त्र मित्रों को मात्र ग्यानार्थ दे रहा हुँ !! किसि भी प्रकार कि साधना करने से पुर्व उस साधना को जानने वाले साधक से दिक्षा ले कर ही प्रारंभ करे या मार्ग दर्षण में करे !!इन साधनाओ का गलत स्तेमाल करने वाले के साथ गलत ही होगा !! यह प्रकृ्ति का शास्वत नियन है कि जो जैसा करता है वैसे भरता है !!जो जैसा बोता है वैसा ही फ़ल प्राप्त होता है!!
!! भुतडामर तन्त्र !!
आदेश नमो नम:
भारतिय विद्धयाओं मे मन्त्र शास्त्र एक अनुपम बहुमुल्य निधि है!
सर्व भुतेश्वर देवाद्गिदेवमहादेव इसकी प्रेरणा के मूल श्रोत है!कलियुग के मे समस्त प्राणियों के अल्पग्यान एवं सामर्थ का उन्हे पूर्वाभास था !अत: कम परिश्रम से ही भक्तों कि कार्य सिद्धि के लिये उन्होने “भूतडामरतन्त्र” का उपदेश किया !
जब काल के प्रभाव से यह शास्त्र लगभग लुप्त सा हो गया तब श्रीनाथसिद्धों, ऋषियों महिर्षियों,सिद्ध योगियों,महात्माओं ने तपोबल द्वारा मन्त्रों तथा यंत्रों को अर्जित करके उसमे दैवी शक्तियोंशक्तियों को स्थापित कर समान्य-जन के उपकार्थ उपलब्ध कराया !!यह प्रथम बार हिन्दी अनुवाद मे प्रस्तुत किया जा रहा है!!यह ग्रंथ सोलह पट्लो मे है जिसका क्रमश: वर्णन किया जायेगा!
यह ग्रंथ श्री उन्मत भैरव एवं उन्मत भैरवी के संवाद के रुप मे आरंभ होता है!!
जिसमे यक्ष,मनुष्य,भुजंग,किन्न्र,प्रथम,नापिकादि के सिद्धि लाभ तथा रक्षा के प्रकरण मिलते है!!इसमे सभि देवताओं एवं भुतादिगणों के मारण का उल्लेख है!
सुन्दरि साधना,पिशाचिनि चेटिका साधन,अष्टकात्यानी साधना,प्रथमाधिपक्रोधराज साधना,कैकरी साधना,चेटिका साधना,भूतनि साधना,अपसरा साधना,यक्षिंणी साधना,अष्टनागिनी साधना,किन्न्र साधना,योगिनी साधना, इत्यादि का उल्लेख है!!यह तन्त्र मित्रों को मात्र ग्यानार्थ दे रहा हुँ !!
किसि भी प्रकार कि साधना करने से पुर्व उस साधना को जानने वाले साधक से दिक्षा ले कर ही प्रारंभ करे या मार्ग दर्षण में करे !!इन साधनाओ का गलत स्तेमाल करने वाले के साथ गलत ही होगा !! यह प्रकृ्ति का शास्वत नियन है कि जो जैसा करता है वैसे भरता है !!जो जैसा बोता है वैसा ही फ़ल प्राप्त होता है!!
!!भूतडामरतन्त्रम्!!
!!ऊँ नम: क्रोध भैरवाय नम:!!
आकाशवदन,विशालकाय,प्रलयकाय,अनलसम,विभासम्पन्न तथा अभेद्ध्यकारी भूतडामर नामक उन्मत्तभैरव का स्तवन कर रहा हुँ!उन्मत्त भैरवी त्रिभुवनाधिश्र्वर देवसिद्धसेव्य रुद्र रुपि उन्मत्त भैरव को नमस्कार करके उनसे पुछ रही हैं!!2!!
!!भैरव्युवाच !!
भैरवी कती हैं,हे भैरव! कलिकाल में जम्बुद्विप में यक्ष,मनुष्य,भुजंग,किन्नर,प्रमथ,नायिकादि सभी किस प्रकार सिद्ध लाभ कर सकते है!जो मनुष्य पापिष्ठ,मिथ्यावादी,दु:खशिल एवं आलसी है!वे सकल मानव अपनी रक्षा किस प्रकार कर सकते है!!
इस कलि से दृ्ष्ट पापराशि किस प्रकार विनिष्ट हो,सर्व प्रकार,मंगलदायक और अभिलिषित मोक्ष पद्धिति क्या हैं!!जिससे महापाप राशि नष्ट हो और किसि प्रकार अणिमादि अष्ट सिद्धियों का लाभ प्राप्त किया जाये!!
हेदेवेश! अपर जाति के अना भोजन और अपर जाति के स्त्रिगमन से उत्पन्न पाप समुह किस प्रकार नष्ट हो? किस प्रकार तमिस्त्र नरक कि यन्त्रणा का नाश हो!!
किसि प्रकार देव,सिद्ध,सर्प,भूत,यक्ष ,गुह्यक तथा नायिका सभी चन्द्रसूर्यवत तेज: समन्वित होकर रुद्रपुर में चिरकाल तक अवस्थान कर सके !!
किस प्रकार कामातुरा स्त्रीगण दूर से आकर बलपूर्वक आलिंगन करती है?प्रभौ! किस उपाय से ब्रह्मा,शिव,इन्द्र प्रमुख देवगणों को भी विनश्ट किया जा सकता है?
किस प्रकार से मृ्त व्यक्ति पुनर्जिवित होकर अजरामर होताहै? यह सब कृ्पा करके मुझे बताये!!
उन्मत्त भैरव प्रिया के इन सब वाक्यो को बार-बार सुनकर प्रशन्तचित होकर भेरवी से विनय पूर्वक कहने लगे!!
उन्मत्तभैरव उवाच!!
भैरवी! मै नमस्कार करके क्रोधपति,गगनमुख,वज्रहस्त,देवगणों के विनाशक,भूपति भूतडामर को विस्तृ्त रुपसे बताऊंगा इससे सभी पाप नष्ट होते है!दु:ख तथा दारिद्रय दूर होता है,सभी प्रकार का रोग नष्ट होता है! सभी प्रकार के विघ्नो का विनाश होता है,महाप्रभाव की वृ्द्धि होति है तथा दुष्ट चित्त समूहों का दमन होता है! यह सब भूतडामर अत्यन्त चमत्कार जनक है,इसके शक्ति से सृ्ष्टि,स्थिति तथा प्रलय हो सकता है! इस भूत डामर केग्यानमात्र से ही इस लोक में विविध प्रकार भोग तथा परकाल मेंमुक्तिलाभ होता है!!
महादेवि! मैं तुम्हारे स्नेह के वशिभुत होकर यह अत्यन्त गोपनिय और अद्भूत विष्य कह रहा हुँ,जो स्वर्ग के देवगणों,मृ्त्यु लोक के मुमुक्षु,मानवगण और नागलोक समूह के लिए भी दुर्लभ हैं!!
हे प्रिये!तुम इस्को श्रवण करो क्योकीं इसके ग्यान के बिना नारियों के निकट निग्रह एवं यक्षणियों को अभिलाषित सिद्धि लाभ नहीं होति है!!
!!साधना प्रकरण!!
श्री उन्मत भैरव ने कहाकी मैं अत्यन्त गोपनिय उत्तम मन्त्र कह रहा हुँ!जिसके द्वारा देवता एवं भूतगणों का भी मारण कार्य सिद्ध हो जाता है!!
”ऊँ वज्र-ज्वालेन हन-हन सर्वभूतान हूँ फट्”-
इस मन्त्र के चैतन्य होने मात्र से क्रोध भैरव के रोम कूपोंसे वज्रज्वाला जन्म लेती है और प्रमथादि भूतगण विशुक होते है !! इससे सभी देव्गतागण भी यम-शासन के अधिन हो जाते है!!
क्रोधभैरव के उन्मत्त भैरवी से इस प्रकार कहने पर रुद्रादि देवगण विस्मित हो कर क्रोध भैरव से कहने लगे भैरव! इस समय आप इनलोगो का निग्रह मतकिजिये! सभी भूत तथा भूतनी आपके वाक्य का प्रतिपालन करेगें!
”ऊँ वज्रमुखे सर सर फट्”-
यह विग्यानाकर्षिणि नामक मन्त्र है! इस मन्त्र के उच्चारण करने से वज्र-भय का निवारण होता है !यही मृ्त संजीवनी विद्ध्या मन्त्र है,इसी मन्त्र के द्वारा मृ्त व्यक्ति जीवित होता है !!,इसी मन्त्र के प्रभाव के द्वाराभूतादी विनष्ट होते है!!
इसके पश्चात भूतनाथ,उन्मत्त भैरव का पाद ग्रहण एवं नमस्कार कर के कहने लगे,अप परित्राता षडैश्वर्यशालि पुरुष प्रधान है! जम्बु द्विपमें,कलियुग मे समस्त प्राणि वर्गो को तथा मुझे परित्राण किजिये !!
श्री उन्मत्त भैरव कहते है-रस,रसायन,सुखभोग,सुवर्ण,विदूरपर्वतजात मणि,मुक्ता,गन्ध द्रव्य,वस्त्र,खाने की वस्तुए,पुष्प मोक्ष आदी अभीष्ट वर मै उच्चारण करने वालो को प्रदान करता हु!
क्रोध भैरव मन्त्र का जो जप करते है,हम उन लोगो के भृ्त्य एवं भूतनी गण दास हो जाते है !!जरा,अनिष्ट तथा पाप से सम्भुत भय,राजा एवं तस्कर भय,भूत,प्रेत,पिशाच आदि सभि अशुभ भय विनिष्ट हो जाते है!
यदि भूतनी,यक्षनी,पिशाचादि साधकों के प्रति सिद्धि प्रदान नहीं करते हैं,तब निश्र्चय ही तत्क्षण उन लोगों का मस्तक क्रोधवज्र के द्वार स्फ़ाटित करते हैं उन्मत्त भैरव!! अथवा अग्नि मेांथवा महाघोर नरक में निक्षेप करते है!!
ऊँ संघट्ट-संघट्ट मुतान जीवय स्वाहा”-इस मन्त्र का उच्चारण करने से भूतादि समस्त देवता मूरछित हो जाते हैऔर जब उठते है तो अतम्भित,कम्पित एवं विह्वल होते है!!
इसके पश्चात महादेव,क्रोध भैरव से बार-बार कहने लगे! वज्रपाणि क्रोध भैरव आप के अलावा दुसरा त्राण कर्ता और कोई भी नही है!!
इसके पश्चात वज्रपाणि क्रोध भैरव,महादेव जी कहने लगे,
भयभीत मत होना,तुम्हारा तथा अन्य सभी देवतागणों का तथा जम्बुद्विपस्थ मनुष्यों के हितों के लिये कलियुग में भूतनिग्रह करुँगा!
प्रमथ गण,अपसरा,नागिणी,यक्षिणि,आदि अंगणागण क्रोधभैरव को प्रनाम करके पुन: कहने लगे-अब हम लोगों की रक्षा किजिए!!
इस्के बाद कुलिशपाणि लोमहर्षण क्रोध भैरव कहने लगे- सुन्दरि! त्रिपुरे! भद्रकालि! भैरवचण्डिके !तुम सभी मेरे जापक नरगणों की उपासना करो तथा उन सब को कान्चन,अभिलशित भक्ष्य द्रव्य वस्तु आदि प्रदान करो!!
यक्षिणि,अप्स्रा,देवकन्या तथा नागकन्याए कहने लगी-हे देवेदेवेश!
हम सभी आपके उपासक वर्गों की उपासना करेगे एवं उन सभी को प्रार्थित धन भी प्रदान करेगे ! हे प्रभु यदि हम सभी आपके वचन की अन्यथा करते है तो कुल समेत हम लोग नष्ट हो जाये! जो लोग क्रोध भैरव मंत्र की उपास्ना करते है !
हम सब उनसभी के दासि हो कर सभी कार्य साधन करेगें!!हम यदि आपके वचन का अन्यथा आचरण करते है ,तो आप हम सभी के मस्तक क्रोध व्ज्र के द्वारा सतधा विदिर्ण कर दे !! अथवा हम सब को नरक में निपातित कर दे !
अस्निधर क्रोध भैरव देवगणौ के प्रति कहने लगे,तुम सब साधु,नायिका गण जो सब मनुषय क्रोध भैरव का मन्त्र जप करते है तुम सब उन सबो की अपासना करो एवं निलकांतादी मणि तथा कनक मौक्तिक इत्यादि द्रवय सभि द्रव्य अन सभी को अर्पण करो!
यक्षि गण “इसि प्रकार हो कहकर सुरासुरादिध्वंशकारी क्रोध भैरव को नमस्कार करके उनके आदेश मस्तक में धारण करके स्व स्थान में प्रस्थान करने लगे!! इसप्रकार कलिकाल मे जम्बु द्विप में नायिका गण अष्ट सिद्धि प्रदायनी हुये है!!

2….अतिदुलर्भ ग्रन्थ “भूत डामर महातन्त्रम्” (पाताल खण्ड) की अलौकिक शक्ति अतिचिरन्तन है।

प्रस्तुत पुस्तक की गोपनीयता इसी तथ्य से निगमित की जा सकती है कि इस पुस्तक का उल्लेख्र किसी भी अन्य तन्त्र ग्रन्थ में अनुपलब्ध है। विष्‍ाय गार्म्भीय, सारगर्भिता, अलौकिकता परिणाम-स्वरूप प्राप्तव्य मंगलतत्तव को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तुत के प्रकाशन की तीव्र अभिलाषा अतिदीर्घकाल से मानस रूप देने में छिपी थी किन्तु कतिपय विषय परिस्थितियाँ छिपी मानस – आकांक्षा को साकार रूप देने में अवरोध उत्पन्न कर रही थीं। परिणामस्वरूप सुधी पाठक प्रस्तुत अति दुर्लभ पुस्तक द्वारा आध्यात्मिक अनुरंजर से वंचित रहे, जिसका अत्यनत खेद है।

भूत डामर तन्त्र 1993 में प्राच्य प्रकाशन, वाराणसी द्वारा हिन्दी अनुवाद सहित प्रकाशित की गयी थी। “भूत डामर महातन्त्रम्” (पाताल खण्ड) का उल्लेख भूत डामर तन्त्र में होने के कारण सुधी पाठकों द्वारा “भूत डामर महातन्त्र” के प्रकाशन के सम्बन्ध में सतत पत्राचार किया जाता रहा है। श्रेष्ठ सुधी पाठकों के स्नेहिल आग्रह से वशीभूत हो हमने यह दुर्लभ पुस्तक अविलम्ब प्रकाशित करने का निर्णय लिया जो आज आपके सम्मुख प्रस्तुत है। यदि यह पुस्तक किंचित रूप में भी कतिपय पाठकों को आध्यात्मिक एवं बौद्धिक संतुष्‍िट देने में सफल हुई तो मैं स्वकृत्य को सफल समझूँगी।

प्रस्तुत ग्रन्थ में शिव एवं रावण तथा शिव एवं पौलस्त्य सम्वाद का उद्धरण है। उक्त सम्वाद अष्टविंशति उल्लासों में विर्कीण है। प्रत्येक उल्लास में सम्वाद की परिणति का निष्कर्ष गहन आध्यात्मिकता की गोपनीयता को अपने में समाहित किये हुए है। प्रथम उल्लास से चतुर्थ उल्लास तक शिव एवं रावण सम्वाद में शत्रुमारण के महासावर मन्त्रों का, पञ्चम उल्लास में स्तम्भनधिकार तथा रिपुशास्त्र स्तम्भन, षष्ठ उल्लास में शत्रु उच्चाटन अधिकार तथा रिपूच्चाटन, सप्तम उल्लास में शत्रुविद्रेण, अष्टम उल्लास में शिव रावण सम्वाद में सर्प, वृश्चिक, सिंह, विषादिवं धनं आदि, नवम् उल्लास से शिव पौलस्त्य सम्वाद में वशीकरण, दशम् मे आकर्षण, एकादश में मन्त्रोंत्कीलन, द्वादश में मन्त्र शोधन, त्रयोदश में हनुमत्पताका, चतुर्दश में पताकादि युद्ध प्रकरण का उल्लेख है! पञ्चदश उल्लास में लक्ष्मीबीज एवं तार बीज से शोभयमान है। षोडश उल्लास से श्यामादि मन्त्र, दक्षिणामूर्ति के उद्धार कोश, सकलागम सार, षोडश देवी, सप्त कुमार, नवग्रह, सप्त देवी व तस्त्र देवी शाख्यानाम्, जनविधान, खगति कथन, कौतुकादिकथन, यवनासुरे महाविद्या, पुत्रविधि कथन, विधान जनविधिनमि, मन्त्रफलस्तुति कथन का उल्लेख है।

“भूत डामर महातन्त्रम्” (पाताल खण्डे) वस्तुत: पारलौकिक आन्तरिक ऊर्जाओं के मार्जन का ऐसा आधार है, जो अक्षत है। रहस्यात्मकता को स्व में प्रच्छन्न किये हुए भी रहस्योद्घाटन हेतु व्याकुल होने के कारण विषय के सहज बोधन हेतु आधार बनाने मे प्रयासरत है। अतएव प्रस्तुत ग्रन्थ आध्यात्मिकता के विराट फलक एवं अन्त:वृत्ति का अद्भुत समायोजक है।

आत्माओं को बुलाने का खेल (एक्सॉर्सिस्म), जानिए पूरा तरीका
दोस्तों रूह या आत्माएं क्या होती है ये हम सभी जानते है कुछ लोग नाम सुनते ही डर जाते है और कुछ लोगो को इनसे बात करने में मजा आता है, तांत्रिक लोग इन पर रिसर्च कर इन्हे काबू में भी कर लेते है।
दोस्तों अलग अलग आत्माएं अलग अलग प्रकार से व्यवहार करती है। यह निर्भर करता है की इंसान मरने से पहले कैसा था

क्या होता है जब हम मरे हुए लोगो की आत्माओं को बुलाते है ? कुछ आत्माएं चाहती है की लोग इनसे बात करे और उनकी बात सुने पर कुछ आत्माएं खतरनाक होती है बेहद खतरनाक और उन्हें बिलकुल भी छेड़ा नही जाना चाहिए।

आइये जानते है कितने तरीके से और कैसे आत्माओं को बुलाकर उनसे बात की जा सकती है -

- मोमबत्ती से आत्मा को बुलाना
चार- पांच लोग एक घेरा बना कर बैठ जाएं और बीच में एक बोर्ड या पेपर रख लें जिसे ओइजा बोर्ड कहते है इस बोर्ड पर ऐ से लेकर जेड तक सारे अक्षर लिखे होते है, 0 से 9 तक नंबर लिखे होते है और यस और नो ( हाँ या न ) लिखा होता है। अगर ऐसा बोर्ड नही है तो आप लिख भी सकते है। चारों कोनो पर मोमबत्ती जला लीजिये और सभी लाइट्स ऑफ कर दीजिये अब एक कॉइन ( सिक्का ) लीजिये और बीचों बीच रख लीजिये, सबकी उँगलियाँ उस कॉइन पर होनी चाहिए।
अब सभी अपनी अपनी आँखें बंद कर लीजिये और आत्मा को आवाज दीजिये। इसके लिए कोई मन्त्र या स्पेशल वर्ड्स बोलने की जरुरत नही है, बस सिर्फ आत्माओं को आवाज दीजिये जैसे की – अगर कोई आत्मा हमारे आसपास है या गुजर रही है तो हमे जवाब दे हम आपसे बात करना चाहते है, क्या यहाँ कोई आत्मा है जो हमे सुन सकती है तो संकेत दें, इस दौरान आपको कॉइन को सर्किल की शेप में बीच में ही गोल गोल घुमाना है, अगर वहां आत्मा हुई या आपसे संपर्क किया तो कॉइन में अजीबसी हरकत होगी तब आप अपने हाथ हटा लें और आँखे खोल लें, याद रहे अब आप ऐसी कोई भी हरकत ना करें जिससे आत्मा को अपना अपमान लगे वहां से भागिए तो बिलकुल भी नही।
आप शांति से अपने सवाल पूछिये जैसे इस वक़्त हम कितने दोस्त यहाँ मौजूद है ? और देखिये तमाशा। आत्मा खुद आपको जवाब देगी – फ़र्ज़ कीजिये आपलोग 12 लोग है तो सिक्का पहले एक नंबर पर जाएगा फिर दो नंबर पर मूव करेगा। सिक्का नंबर्स लेटर्स या हाँ या नही पर मूव कर आपको पूछे गए सवालों का जवाब बताता रहेगा।
सावधान ! आत्मा से उनके पर्सनल सवाल कभी मत पूछियेगा की उनकी मौत कैसे हुई ? या और कुछ। जब आप खेल लें तो उन्हें नम्रतापूर्वक कहें की धन्यवाद अब हम चाहते है की आप चली जाये, क्या आप जा रही है सिक्का यस पर जाएगा, इन्तेजार करें कुछ समय बाद फिर पूछे क्या आप यहाँ है ? सिक्का मूव नही हुआ मतलब आत्मा जा चुकी है।

आमतौर पर आत्मा जाने से इंकार नही करती है, फिर भी यह प्रयोग किसी अनुभवी के साथ ही करें। देश भर में इसी तकनीक से लोग आत्माओं से बातें करते है।

**********आत्मा आह्वान की विधियां**************

आत्मा आह्वान की कई विधियां भारत में प्रचलित है – आटोमेटिक राइटिंग (स्वचलित लेखन), आटोमैटिक टायपिंग, बालक के द्वारा, यंत्र द्वारा आत्मा आह्वान, प्लेनचिट द्वारा तथा आत्म रत्न के द्वारा।
आटोमेटिक रायटिंग –
1…..इस विधि में साधक को एक माध्यम की आवश्यकता होती है जो सरल चिŸा और निस्वार्थ मन का व्यक्ति हो। अनुभवी साधक या व्यक्ति बिना माध्यम के भी यह प्रयोग स्वयं कर सकता है। इस प्रयोग को रात में किसी शांत कमरे में करना चाहिए। सर्वप्रथम कमरे में धूप या अगरबत्ती जलाकर कमरे के वातावरण को शुद्ध एवं पवित्र बना लें। तत्पश्चात् माध्यम को पीले आसन पर बैठाकर चारो तरफ 4-5 व्यक्तियों को बैठा दें और माध्यम के हाथ में एक पेन दे दें तथा सामने एक कापी रख दें। अब सभी लोग हाथ जोड़कर किसी आत्मा का आह्वान करें और साधक आत्मा आह्वान मंत्र का 11 या 21 बार जप करें। तो आत्मा उस माध्यम के शरीर में प्रवेश कर जाता है तथा आपके द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब कलम से कापी के पन्नों पर लिख कर देता है।
आटोमेटिक टायपिंग –
2…..यह भी आटोमेटिक रायटिंग की तरह प्रयोग किया जाता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि इस विधि में टायपिंग की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रयोग में माध्यम को टाईप राइटर के सामने बैठाकर उपरोक्त विधि के अनुसार आत्मा का आह्वान किया जाता है, तब आत्मा आकर टाइप राइटर के जरिये साधक द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब देता है।
बालक द्वारा –
3……- इस प्रयोग के लिए 8 या 10 वर्ष के आयु के बालक की आवश्यकता पड़ती है, जो शांत चित् और सरल स्वभाव का हो। उसे एक छोटे से कमरे में बैठाकर 6-7 व्यक्ति उसके सामने बैठ जायें तथा कमरे को अगरबŸाी जलाकर वातावरण को शुद्ध कर दें और बालक के कपड़े पर इत्र लगा दें। फिर साधक आत्मा आह्वान मंत्र का 21 बार आत्मा के नाम सहित उच्चारण करें और सामने बैठे हुए सभी व्यक्ति हाथ जोड़कर निवेदन करें कि अमुक आत्मा इस बालक के शरीर में विराजमान हों। ऐसा 5 या 7 बार करने से बालक के चेहरे का रंग स्वतः बदल जाएगा। तब आप समझ लें कि आत्मा आ गई है। अब आप उस आत्मा से उसका नाम पूछें। फिर जो भी सवाल पूछना चाहते हों वह पूछ सकते हैं।
आत्मा आह्वान यंत्र-
4……यह यंत्र विशेष प्रकार से ताम्र पत्र पर अंकित होता है। यह यंत्र बहुत प्रभावशाली होता है। इसके माध्यम से किसी भी आत्मा सें डायरेक्ट संबंध स्थापित किया जा सकता है और सामान्य व्यक्ति भी इसके माध्यम से किसी भी आत्मा से डायरेक्ट संबंध स्थापित किया जा सकता है और सामान्य व्यक्ति भी इसके माध्यम से किसी भी आत्मा से किसी भी प्रकार के सवालों का जवाब प्राप्त कर सकता है। इस प्रयोग को रात के सात बजे के लगभग करना चाहिए। सर्वप्रथम लकड़ी के तख्ते पर सफेद आसन बिछाकर आत्मा आह्वान यंत्र को स्थापित कर दें और सामने घी का एक दीपक जला दें तथा अगरबŸाी धूप या गुगुल जलाकर कमरें के वातावरण को शुद्ध बना लें। तत्पश्चात् आत्मा आह्वान मंत्र का 21 बार जप करें। तो दीपक की लौ हिलकर इस बात का संकेत देता है कि आत्मा यंत्र में विराजमान हो गयी है। कभी-कभी तेज हवा का झोंका का अनुभव भी होता है। तब हाथ जोड़कर नम्र भाव से जो कुछ पूछना हो वह पूछ सकते हैं और अंत में हाथ जोड़कर कहें आप हमारे बुलाने पर आये इसके लिए आपको धन्यवाद। अब आप जा सकते हैं। इसी तरह आप अपनी समस्याओं का समाधान आत्माओं के द्वारा पूछ सकते हैं। ध्यान रहे किसी आत्मा को बार-बार बुलाकर कष्ट न दें।
प्लेनचिट –
5……प्लेनचिट का अविष्कार 1889 में इंग्लैंड के परावैज्ञानिक चैटस्मिथ के द्वारा किया गया था। इस प्रयोग में एक सनमाईका प्लाई की आवश्यकता होती है जो दो फिट लंबा और दो फिट चैड़ा होता है। उस सनमाईका में किसी पेंट से एक गोल घेरा बनाएं उसके चारों तरफ ’ए‘ से ’जेड‘ तक के सारे अक्षर क्रमानुसार लिखें और घेरे के बीच एक से नौ तक के अंक भी लिखें तथा एक शून्य भी बनायें चारों दिशाओं में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भी लिखें। घेरे के मध्य में यस और नो लिखें। फिर उसे धूप में सुखा दें। जब प्रयोग करना हो, तब किसी एकांत कमरे में धूप दीप जलाकर कमरे के वातावरण को शुद्ध बना लें। तत्पश्चात कांसा, त्रिधातु या अष्ट धातु से निर्मित कटोरी या प्लेनचिट उलटा रखें जो विशेष अवसर पर निर्मित एवं आत्मा आह्वान मंत्र से चैतन्य किया गया हो। फिर 4-5 व्यक्ति उस कटोरी पर हल्के से अपनी तर्जनी उंगली रखें। तत्पश्चात जिस आत्मा को बुलाना हो उस आत्मा का ध्यान करते हुए आत्मा आह्वान मंत्र का 11 या 21 बार जप करें तो कटोरी स्वयं चलने लगेगी तब एक कोने में मिश्री या शक्कर का नैवेद्य रख दें और उस आत्मा से उसका नाम पूछें तो वह कटोरी फिसलती हुई पहले आर में फिर ए पर फिर एम फिर आर, ए, जे पर प्लेनचिट फिसलती हुई जाएगी इस तरह उन शब्दों को जोड़कर रामराज शब्द बनेंगे इस तरह स्पष्ट हो जाएगा कि रामराज नाम की आत्मा आपके प्लेनचिट में विराजमान हो गयी है, तब आपको जो भी सवाल पूछना हो वह पूछ सकते है। सभी सवालों का जवाब कटोरी या प्लेनचिट फिसलती हुई देगी। इस प्रयोग में विस्तारित जवाब की आशा न करें। सभी सवालों का जवाब हां या नहीं में प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रयोग को प्रदर्शन के उद्ेश्य से कदापि न करें। हमेशा जन कल्याण की भावना से इस प्रयोग को करना चाहिए। कोई भी सामान्य व्यक्ति या साधक यह प्रयोग सफलतापूर्वक कर सकता है। बसरते प्लेनचिट प्राण प्रतिष्ठा युक्त हो।
आत्मरत्न:-
6…….भारत के पौराणिक गं्रथों में एक विशेष प्रकार के रत्न का उल्लेख मिलता है, जिसे ’आत्मरत्न‘ कहते है। इस रत्न को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर पहनने से कोई दिव्य आत्मा हमेशा उसकी रक्षा करती है। विदेशों में इस प्रकार की मुद्रिका को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। विदेशों में बहुत से लोग ऐसी मुद्रिका को धारण किये रहते है। इस रत्न की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे गौर से देखने पर इसकी लकीरें हिलती-डुलती नजर आती हैं। आत्मा आह्वान में इस रत्न की बहुत विशेषता होती है। इसके द्वारा आत्माओं से डायरेक्ट संबंध स्थापित किये जा सकते है। इस मुद्रिका पर त्राटक करते हुए जिस आत्मा का आह्वान किया जाता है, वह आत्मा तुरंत उस रत्न में दिखाई देने लगती है। तब जो भी प्रश्न पूछना हो पूछ सकते हैं। सभी सवालों का जवाब प्रश्नकर्ता के मन में स्वतः मिल जाता है।
इस तरह आत्माओं से संपर्क स्थापित करके सभी प्रकार के सवालों का जवाब प्राप्त किया जा सकता है एवं समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इस प्रकार आप जनहित एवं लोक कल्याण कर समाज में अपना नाम रोशन कर सकते है। इस क्षेत्र में रूचि रखने वाले साधकों एवं पाठकों को इच्छाशक्ति साधना अवश्य कर लेना चाहिए। जिससे आत्माओं से संपर्क स्थापित करने में कोई कठिनाई न हो। साधना विधि निम्न प्रकार से है –
किसी भी माह की पूर्णिमा को रात्रि 10 बजे स्नान कर सफेद धोती पहनकर पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ जायें। सामने किसी तख्ते पर सफेद आसन बिछाकर इच्छाशक्ति यंत्र को स्थापित करें। तत्पश्चात विद्युत माला से निम्न मंत्र का 21 माला जप करें।
मंत्र – ¬ हृीं क्लीं क्लीं हृीं ¬
इस प्रकार 6 दिन तक करें तो साधक की इच्छाशक्ति तीव्र हो जाती है। वह किसी भी आत्मा से संपर्क स्थापित करने में समर्थ हो जाता है।
आत्मा आह्वान मंत्र-
¬ हृीं क्लीं अमुक आत्मा स्थापयामि फट्।
उक्त मंत्र को इच्छा शक्ति मंत्र के बाद उसी माला से सात माला जप करना चाहिए। अमुक के स्थान पर जिस आत्मा को बुलाना चाहें उसका नाम लें।
विशेष चेतावनी ::
7……इस पोस्ट का एकमात्र उद्देश्य जानकारी प्रदान करना है |इसे पढ़कर कोई भी प्रयोग न करें |बिना गुरु के ,बिना रक्षा कवच के ,बिना योग्य मार्गदर्शन और उपयुक्त समस्त जानकारी के कोई भी प्रयोग आपके जान को जोखिम में डाल सकती है |किसी भी लाभ अथवा हानि के हम जिम्मेदार नहीं होंगें |आत्माए अगर लाभदायक हो सकती हैं तो अधिकतर अतृप्त और नुकसानदायक भी होती हैं ,आप नियंत्रण न कर पाए तो आपका अहित हो सकता है |इसलिए बिना गुरु के कदापि कोई प्रयोग न करें |

 

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